March 13, 2026 12:50 pm

ऐतिहासिक नग्गर कैसल दो साल के लिए हुआ बन्द।

कुल्लूहिमाचल प्रदेश में इस बार मार्च माह के अंत में ही समर सीजन का समापन हो गया है। पहले अप्रैल माह तक ठंड का मौसम जिलाभर में रहता था, लेकिन इस बार अप्रैल माह शुरू होने से पहले ही गर्मी का मौसम शुरू हो गया है और बाहरी राज्यों से लेकर सैलानी तक यहां के जंगलों को देखने के लिए भी काफी अधिक संख्या में गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। ऐसे में सैलानी जिले के पर्यटन स्थलों का रुख कर रहे हैं, लेकिन इस सबके बीच एक ऐतिहासिक इमारत के दीदार अब सैलानियों को आने वाले दो साल तक नहीं मिलेंगे। जिले की राजधानी नागर में ‘नागर कैसल’ के नाम से मशहूर इमारत है और इसके परतदार काम को दो साल के लिए बंद कर दिया गया है। पर्यटन विभाग द्वारा जीर्णोद्धार को लेकर निविदाएं जारी की गई हैं। ऐसे में अब पुरानी शैली की इस इमारत की शुरुआत होगी, फिर यहां पर वेलनेस सेंटर का भी निर्माण होगा, ताकि सैलानी यहां घूमने के साथ-साथ अपनी सेहत का भी ध्यान रख सकें। इस किले का निर्माण राजा सिद्वि सिंह ने 16वीं शताब्दी में करवाया था। 17वीं शताब्दी के मध्य से लेकर राजा महाराजा तक इसे शाही महल और शाही मुख्यालय के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था। बाद में इसे सचिव के राजा जगत सिंह ने अपनी राजधानी बनाया। नागर कैसल का यह किला 1905 में आए भीषण भूकंप में भी खड़ा रहा और इस किले को कोई नुकसान नहीं हुआ। यहां का इतिहास किले की दीवारों पर स्थापित है। यहां घूमने आने वाले को भी स्टूडियो की निर्माण शैली काफी पसंद आती है। वर्ष 1846 तक इस घराने के प्रतिष्ठित किले का उपयोग ग्रीष्मकालीन महल के रूप में किया गया था, लेकिन जब अंग्रेज़ों ने सारा शिष्य सिखों के अधिकार से उद्यम कर अपने व्यवसाय में ले लिया, तब राजा ज्ञान सिंह ने इसे एक बंदूक के रूप में प्रमुखता से बेच दिया था। इसके बाद इसे बनाए रखने के लिए यूरोपियन रहन-सहन के ढांचे में बदलाव किया गया। कुछ समय बाद मेजर ने इसे सरकार को बेच दिया और इसका प्रयोग ग्रीष्मकालीन न्यायालय के रूप में होने लगा। अब यह किला प्रदेश सरकार के अधीन है। राज परिवार के सदस्य दानवेंद्र सिंह का कहना है कि नागर स्टूडियो ने उनकी खरीददारी की थी और नागर स्टूडियो के अंदर ही जगती पट मंदिर भी है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर के दर्शन के लिए यहां भी लोगों की सूची है और नगर के महलों की सुंदरता को निहारते हैं। जगती पाट में देवी देवताओं से संबंधित सभी कार्य पूरे किये जाते हैं। उनका कहना है कि नागर स्टूडियो राजघराने द्वारा बनाई गई इमारत है, जिसे अब पर्यटन निगम द्वारा एक होटल में बदल दिया गया है। जिला पर्यटन विकास अधिकारी सुनैना शर्मा ने बताया कि नागर कैसल के जर्नोद्वार के लिए एशियन डिवेलपमेंट बैंक की सहायता से काम किया जा रहा है। इस पर 11 करोड़ 57 लाख रुपये की राशि खर्च होगी। उन्होंने कहा कि दो क्लासिक्स के लिए इसे बंद कर दिया गया है। दो साल तक की वसूली के बाद यह सालानियों के लिए खोल दिया गया। ऐसे में दो साल तक यहां आने वाले सलीन इस स्टूडियो का दीदार नहीं कर सके। नागर कैसल के मूल रूप से कोई भी स्टैण्डर्ड नहीं मिलेगा।यह किला ब्यास नदी के तट पर बना हुआ है। इस किले के परिसर में देखने के लिए अन्य आकर्षक और दर्शनीय स्थल भी हैं, जैसे मंदिर, कला गैलरी, इसके अलावा यहां पर भव्य बॉलीवुड फिल्मों की शूटिंग भी होती है। नागर स्टूडियो बॉलीवुड निर्माता- निर्देशकों की पसंदीदा जगहों में से एक है। इतिहासकार डा. सूरत ठाकुर का कहना है कि यह इमारत आपके लिए एक अजूबा है। इस इमारत की खूबसूरती के साथ-साथ मनोहर मित्र भी दिखते हैं। यहां पुराने दौर की कई सारी सलाइयां भी बनी हुई हैं, जिनमें आज भी सैलानी देख सकते हैं। नागर कैसल किला है। पर्यटन निगम ने नागर स्टूडियो के कुछ मानकों को होटल के रूप में बदल दिया है, जहां सैलानियों के रहने और खाने-पीने की सारी सुविधाएं उपलब्ध हैं।

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