February 15, 2026 2:04 pm

छात्र संघ चुनाव बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन।

शिमला,अगस्त। शिमला जिला कमेटी द्वारा शिमला जिला के विभिन्न महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव की बहाली के लिए धरना प्रदर्शन किए गए । SFI का मानना है कि , समाज का सबसे जागरूक और प्रगतिशील हिस्सा विद्यार्थी समाज है, जो शैक्षिक संस्थानों में पढ़ते हुए सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों की गहरी समझ रखता है। आज उसी विद्यार्थी समाज को वैचारिक, सामाजिक और राजनैतिक रूप से सुस्त और निष्क्रिय बनाने की कोशिश की जा रही है, उसके लोकतांत्रिक हक छीनकर। चूँकि SCA चुनाव छात्रों में क्रांतिकारी चेतना पैदा करने और उनकी लड़ाई को मज़दूर वर्ग के व्यापक आंदोलन से जोड़ने का एक प्रभावशाली औज़ार थे,इसलिए छात्र संघ चुनावों पर पाबंदी लगाना विश्वविद्यालय प्रशासन और सरकारों की सोची-समझी साज़िश है। सरकारें अच्छी तरह जानती हैं कि अगर उन्हें नवउदारवाद (Neoliberalism) के रास्ते पर बढ़ना है जहाँ शिक्षा का निजीकरण, व्यावसायीकरण और साम्प्रदायिककरण किया जाता है तो सबसे पहले उन्हें छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकार छीनने होंगे। क्योंकि एक लोकतांत्रिक और राजनीतिक रूप से सचेत छात्र कभी भी शिक्षा को अपने दायरे से बाहर जाने नहीं देगा।अगर हम हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) की बात करें, तो यहाँ SCA का एक गौरवशाली इतिहास रहा है (सिर्फ़ एक अपवाद छोड़कर)। यहाँ Students’ Federation of India (SFI)—एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील, वैज्ञानिक और धर्मनिरपेक्ष संगठन ने हमेशा SCA चुनावों में सबसे ज़्यादा सफलता पाई है। यही निर्वाचित SCA लगातार विद्यार्थियों के ख़िलाफ़ लाई गई अनेक विरोधी नीतियों और योजनाओं के ख़िलाफ़ लड़ती रही, और इसी के कारण यह विश्वविद्यालय अब तक एक हद तक छात्र हितैषी और समावेशी बना हुआ है, बावजूद इसके कि राज्य में नवउदारवादी नीतियाँ तेज़ी से मज़बूत हो रही हैं। यही SCA था जिसने HPU प्रशासन और राज्य सरकार के कई घोटालों का पर्दाफाश किया और जिसके चलते पूरे प्रदेश में आक्रोश फैला। जब राज्य ने SCA को अपनी सत्ता और हुकूमत के लिए ख़तरा समझा, तो उसने ख़ुद रची गई हिंसा के बहाने SCA चुनावों पर पाबंदी लगा दी,SFI पूरी प्रतिबद्धता के साथ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के छात्र समाज को संगठित कर SCA चुनावों की बहाली के लिए निर्णायक आंदोलन छेड़ने जा रहा है। आज़ से ठीक 12 साल पहले SCA चुनाव बंद किए गए थे। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्रों के बीच जो जवाबदेही (accountability) मौजूद थी, वह पूरी तरह ख़त्म हो गई और उसके नतीजे आज साफ़ दिख रहे हैं—शिक्षा और बुनियादी सुविधाओं का स्तर लगातार गिरता जा रहा है। शिक्षा मंत्रालय की ताज़ा NIRF रैंकिंग इस विश्वविद्यालय की मौजूदा हालत की गवाही देती है। यह उल्लेखनीय है कि पिछले कई सालों में न तो कांग्रेस और न ही बीजेपी सरकार ने इस मसले पर कोई संवेदनशीलता दिखाई है, जबकि लिंगदोह कमेटी ने साफ़ तौर पर उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र संघ चुनाव कराने की सिफ़ारिश की थी।लिंगदोह कमेटी (2006), जिसे मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा गठित किया गया था, ने यह भी माना है कि छात्रों की लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में भागीदारी एक ज़िम्मेदार और जवाबदेह नागरिक समाज बनाने के लिए बेहद ज़रूरी है। इसी आधार पर, SFI माँग करता है कि छात्र संघ चुनाव (SCA Elections) को तुरंत बहाल किया जाए,SFI नामज़द (nominated) SCA प्रणाली का भी कड़े शब्दों में विरोध करता है, क्योंकि यह पूरी तरह ग़ैर-लोकतांत्रिक है। नामज़द SCA महज़ प्रशासन की कठपुतली है, जो सिर्फ़ उनके इशारे पर नाचेगी और छात्रों या संस्थान के मुद्दों से उसका कोई वास्ता नहीं होगा।छात्र केंद्रीय संघ चुनाव (SCA) शैक्षणिक, सामाजिक और लोकतांत्रिक वातावरण को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये लोकतांत्रिक संस्थाएँ न केवल छात्रों को अभिव्यक्ति और नेतृत्व का मंच देती हैं, बल्कि छात्रों और प्रशासन के बीच एक मज़बूत पुल की तरह काम करती हैं। ये छात्र हितों की आवाज़ बुलंद करती हैं, संवाद को बढ़ावा देती हैं और संस्थागत ढांचे के भीतर जवाबदेही सुनिश्चित करती हैं। सक्रिय छात्र भागीदारी कैंपस के सांस्कृतिक जीवन को और अधिक जीवंत और समावेशी बनाती है। यह छात्रों को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करती है और विश्वविद्यालय प्रशासन में पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।इसीलिए, SFI माँग करता है कि छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों की तुरंत बहाली की जाए और उसके तहत SCA चुनावों को पुनः करवाया जाए।

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