शिमला,फरवरी। (एसएफआई) द्वारा वित्त अधिकारी को छात्र हितों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन विश्वविद्यालय परिसर में पारदर्शिता, बुनियादी सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण तथा छात्र समुदाय के अधिकारों की रक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रस्तुत किया गया।एसएफआई, जो एक प्रगतिशील, वैज्ञानिक और लोकतांत्रिक छात्र संगठन है, सदैव से छात्र समुदाय की समस्याओं को गंभीरता से उठाता रहा है। आज सौंपे गए ज्ञापन में मुख्य रूप से तीन प्रमुख मांगों को रेखांकित किया गया है, जो सीधे तौर पर विश्वविद्यालय के प्रशासनिक और वित्तीय कार्यप्रणाली से संबंधित हैं।एसएफआई ने मांग की है कि विश्वविद्यालय की वित्त समिति (Finance Committee) की बैठक 10 दिसंबर 2025 को हो गई है लेकिन अब तक कार्यवाही (Proceedings) को सार्वजनिक नहीं किया गया है इसलिए SFI मांग करती है कि बैठक की कार्यवाही(proceeding) को जल्द से जल्द सार्वजनिक किया जाए। विश्वविद्यालय की वित्तीय नीतियों और निर्णयों का सीधा प्रभाव छात्रों पर पड़ता है। ऐसे में यह आवश्यक है कि वित्त समिति में लिए गए निर्णयों, स्वीकृत बजट, व्यय और प्रस्तावों की जानकारी पारदर्शी तरीके से छात्रों और शिक्षकों के समक्ष लाई जाए।संगठन का मानना है कि पारदर्शिता किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान की आधारशिला होती है। जब वित्तीय निर्णय सार्वजनिक होंगे, तब छात्रों में विश्वास बढ़ेगा और प्रशासनिक प्रक्रिया अधिक जवाबदेह बनेगी। एसएफआई ने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन को नियमित रूप से आधिकारिक वेबसाइट पर वित्त समिति की कार्यवाही अपलोड करनी चाहिए।ज्ञापन में यह भी प्रमुख रूप से उठाया गया कि विश्वविद्यालय परिसर में चल रही बसों की संख्या अत्यंत कम हो चुकी है। पहले जहां आठ बसें छात्रों की सुविधा के लिए उपलब्ध थीं, वहीं वर्तमान में केवल तीन बसें ही संचालित हो रही हैं। इससे हजारों छात्रों को रोजाना आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।बसों की कमी के कारण समय पर कक्षाओं में पहुंचने में बाधा आती है, जिससे शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होता है।एसएफआई ने मांग की है कि तत्काल प्रभाव से नई बसों की खरीद की जाए और परिवहन व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए। संगठन ने यह भी सुझाव दिया कि बसों का नियमित मेंटेनेंस और समय सारणी को सुव्यवस्थित किया जाए ताकि छात्रों को बेहतर सुविधा मिल सके।ज्ञापन में तीसरी महत्वपूर्ण मांग विश्वविद्यालय के छात्रावासों—लड़कों और लड़कियों के हॉस्टल—के नवीनीकरण से संबंधित है। एसएफआई ने वित्त अधिकारी से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि छात्रावासों के नवीनीकरण के लिए कुल कितनी राशि आवंटित की गई है और अब तक उस राशि में से कितना व्यय किया जा चुका है।छात्रावासों की स्थिति लंबे समय से चिंताजनक बनी हुई है। कई स्थानों पर बुनियादी सुविधाओं जैसे शौचालयों की मरम्मत, विद्युत व्यवस्था और कमरों की मरम्मत की आवश्यकता है। छात्र-छात्राओं ने समय-समय पर इन समस्याओं को प्रशासन के समक्ष रखा है, लेकिन ठोस प्रगति देखने को नहीं मिली है।एसएफआई का मानना है कि यदि नवीनीकरण के लिए बजट स्वीकृत हो चुका है, तो उसकी पारदर्शी जानकारी छात्रों के समक्ष आनी चाहिए। इससे न केवल जवाबदेही सुनिश्चित होगी, बल्कि कार्य की गति भी तेज होगी।एसएफआई ने अपने प्रेस वक्तव्य में कहा कि विश्वविद्यालय केवल भवनों और कार्यालयों का समूह नहीं है, बल्कि यह छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों का साझा शैक्षणिक समुदाय है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह छात्र हितों को प्राथमिकता दे।संगठन ने यह स्पष्ट किया कि उसकी मांगें किसी टकराव की भावना से नहीं, बल्कि रचनात्मक संवाद और लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत उठाई गई हैं। एसएफआई ने वित्त अधिकारी से आग्रह किया है कि इन मुद्दों पर शीघ्र सकारात्मक कदम उठाए जाएं और छात्र प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर स्थिति स्पष्ट की जाए।एसएफआई का मानना है कि विश्वविद्यालय परिसर में लोकतांत्रिक परंपराओं को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। जब निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता होगी और छात्र समुदाय को जानकारी मिलेगी, तब ही एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण का निर्माण संभव होगा आज सौंपे गए ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने यह संदेश दिया है कि छात्र अपने अधिकारों और सुविधाओं के प्रति सजग हैं और विश्वविद्यालय प्रशासन से उत्तरदायित्व की अपेक्षा रखते हैं।अंत में एसएफआई ने कहा कि यदि इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो संगठन छात्रों के साथ मिलकर लोकतांत्रिक तरीके से आगे की रणनीति तय करेगा। फिलहाल संगठन को उम्मीद है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र हित में त्वरित और सकारात्मक निर्णय लेगा।













