April 14, 2026 1:54 pm

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में आज आयोजित होगा 27वां डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान, गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा का भी होगा उद्घाटन

शिमला,मार्च।भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में आगामी 6 मार्च 2026 को 27वें डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान (Dr. Sarvepalli Radhakrishnan Memorial Lecture) का आयोजन किया जा रहा है। इस अवसर पर संस्थान परिसर में नवस्थापित “गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा” का उद्घाटन भी किया जाएगा।यह व्याख्यान संस्थान के स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. शशि प्रभा कुमार, अध्यक्ष, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला करेंगी, जबकि मुख्य व्याख्यान प्रो. अरिंदम चक्रवर्ती, विशिष्ट प्रोफेसर, दर्शनशास्त्र, अशोका विश्वविद्यालय, सोनीपत द्वारा दिया जाएगा। कार्यक्रम में प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी, निदेशक, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला स्वागत एवं परिचयात्मक वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे।

इस वर्ष का व्याख्यान विषय है —

_“Humanity as the Heart and Honey of All Living Beings: The Idealistic Realism of Bṛhadāraṇyaka Upanishad.”_

यह व्याख्यान बृहदारण्यक उपनिषद के मधुकाण्ड की दार्शनिक व्याख्या के माध्यम से आदिशंकर के अद्वैत दर्शन, इमैनुएल कांट के प्रत्ययवाद तथा रबीन्द्रनाथ टैगोर के मानवीय दर्शन के संदर्भ में आदर्शवाद और यथार्थवाद के संबंधों पर विचार प्रस्तुत करेगा। व्याख्यान का उद्देश्य समकालीन वैश्विक चुनौतियों—राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक विषमता तथा पर्यावरणीय संकट—के संदर्भ में मानवीय मूल्यों पर आधारित दार्शनिक दृष्टि को पुनः स्थापित करना है। कार्यक्रम 06 मार्च 2026 (शुक्रवार) प्रातः 10:15 बजे से संस्थान के लाइब्रेरी हॉल में आयोजित होगा।इसी अवसर पर संस्थान परिसर में नवस्थापित “गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर चित्रदीर्घा” का भी उद्घाटन किया जाएगा। यह चित्रदीर्घा गुरुदेव रबीन्द्रनाथ टैगोर के जीवन, विचार और रचनात्मक योगदान को समर्पित एक विशेष प्रदर्शनी स्थल के रूप में विकसित की गई है। इसमें टैगोर के जीवन के विभिन्न आयु-चरणों, समकालीन महान व्यक्तित्वों के साथ उनके संवाद, तथा अंतरराष्ट्रीय बौद्धिक मंचों पर उनकी उपस्थिति को दर्शाने वाले दुर्लभ चित्रों को विषयानुसार प्रदर्शित किया गया है।चित्रदीर्घा की एक दीवार गुरुदेव की साहित्यिक, कलात्मक एवं नाट्य कृतियों को समर्पित है, जिसमें उनकी प्रमुख रचनाओं, नाट्य प्रस्तुतियों और कलात्मक अभिव्यक्तियों को प्रदर्शित किया गया है। वहीं दूसरी दीवार पर शांतिनिकेतन और श्रीनिकेतन में विकसित उनके शैक्षिक प्रयोगों और सांस्कृतिक गतिविधियों—जैसे शिक्षा, कला, संगीत, योग, ध्यान तथा सामुदायिक जीवन—की झलक प्रस्तुत की गई है। यह चित्रदीर्घा टैगोर के बहुआयामी व्यक्तित्व और उनकी मानवीय एवं सांस्कृतिक दृष्टि को समझने का एक सजीव माध्यम प्रदान करेगी।भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के अधिकारियों के अनुसार यह चित्रदीर्घा न केवल संस्थान के आगंतुकों और शोधार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक आकर्षण सिद्ध होगी, बल्कि भारत की बौद्धिक और साहित्यिक परंपरा के एक महान प्रतिनिधि के जीवन और विचारों को समझने का अवसर भी प्रदान करेगी।उल्लेखनीय है कि डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन स्मृति व्याख्यान संस्थान की प्रतिष्ठित वार्षिक व्याख्यान श्रृंखला है, जिसमें देश-विदेश के ख्यातिप्राप्त विद्वान समकालीन दार्शनिक और मानवीय प्रश्नों पर अपने विचार प्रस्तुत करते हैं।

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