April 12, 2026 3:25 pm

हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र में दिखा विपक्ष का प्रचंड प्रहार: नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मुख्यमंत्री के खिलाफ पेश किया विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव, आंकड़ों की बाजीगरी और विसंगतियों को लेकर घेरी सुक्खू सरकार।

शिमला,मार्च।हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण का आगाज राजनीति के सबसे तल्ख और आक्रामक तेवरों के साथ हुआ, जहां नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के नेतृत्व में विपक्ष ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की घेराबंदी करते हुए सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही जोरदार नारेबाजी और प्रदर्शन के जरिए सरकार के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। इस हंगामेदार माहौल के बीच विपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन के भीतर और बाहर पिछले तीन वर्षों से बार-बार असत्य और भ्रामक बयान देने का गंभीर आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया को नियम 75 के तहत विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज मोशन) का नोटिस सौंपा। मीडिया से बात चीत करते हुए जयराम ठाकुर ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री जैसे जिम्मेदार संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति से सत्यनिष्ठा और पारदर्शिता की अपेक्षा की जाती है, परंतु वर्तमान सरकार लगातार संवैधानिक मर्यादाओं का उल्लंघन कर रही है। राज्यपाल के पद और उसकी गरिमा का सम्मान है लेकिन सरकार की न कोई उपलब्धियाँ हैं और न ही कोई तथ्य है। विपक्ष ने अपने दावों को पुख्ता करने के लिए आंकड़ों का एक चिट्ठा पेश करते हुए सरकार की प्रमुख योजनाओं की पोल खोल दी, जिसमें सबसे बड़ा प्रहार महिलाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह सम्मान निधि देने के वायदे पर किया गया।  विपक्ष का तर्क है कि सरकार द्वारा बताए गए 35,687 लाभार्थियों और 7.42 करोड़ के कुल खर्च के बीच का गणित ही आपस में मेल नहीं खाता, क्योंकि वास्तविक गणना के अनुसार प्रति माह का खर्च 5.35 करोड़ के करीब बैठता है, जिससे यह साफ झलकता है कि लाभार्थियों को मात्र दो महीने से भी कम की राशि दी गई है जबकि प्रचार-प्रसार पर करोड़ों लुटाए जा रहे हैं।इसी प्रकार, मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना के तहत 4,131 अनाथ बच्चों में से केवल 114 बच्चों को ही शैक्षणिक भ्रमण का लाभ मिलना और शेष लगभग 4,000 बच्चों को उपेक्षित रखना सरकार की संवेदनशीलता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है। कृषि क्षेत्र में ऑर्गेनिक फार्मिंग और गोबर खरीद योजना की जमीनी हकीकत को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि मात्र 0.18 प्रतिशत किसानों का योजनाओं से जुड़ना और साल भर में एक किसान को गोबर खरीद के नाम पर औसतन मात्र 862 रुपए का भुगतान मिलना सरकार की नीतियों को एक भद्दा मजाक साबित करता है। सदन के बाहर मीडिया से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार का ध्यान जनहित के वास्तविक कार्यों से अधिक विज्ञापनों और होर्डिंग्स के जरिए अपनी छवि चमकाने पर केंद्रित है, जबकि धरातल पर योजनाएं पूरी तरह विफल और नगण्य साबित हो रही हैं।सदन में केंद्र सरकार की ओर से मिल रही वित्तीय सहायता का तुलनात्मक विवरण रखते हुए जयराम ठाकुर ने रेखांकित किया कि मोदी सरकार ने हिमाचल को ‘रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट’ के तहत 89 हजार करोड़ रुपए की भारी-भरकम मदद दी है, जो पूर्ववर्ती मनमोहन सिंह सरकार के 18 हजार करोड़ के मुकाबले पांच गुना अधिक है, और इसके बावजूद प्रदेश सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने का प्रयास कर रही है।  जयराम ठाकुर ने दोटूक शब्दों में चेतावनी दी है कि वे मुख्यमंत्री के हर उस झूठ का पर्दाफाश करेंगे जो सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा है, और अब सबकी नजरें विधानसभा अध्यक्ष के उस निर्णय पर टिकी हैं जो इस महत्वपूर्ण प्रिविलेज मोशन की दिशा तय करेगा।

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