March 29, 2026 5:51 pm

भर्ती हुए कृषि विकास अधिकारियों का केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान शिमला के वैज्ञानिकों के साथ संवाद।

शिमला,मार्च। केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला में नए भर्ती हुए कृषि विकास अधिकारियों (ADOS) के लिए एक व्यापक संवाद और अनुभव कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह पहल व्यावहारिक प्रशिक्षण और वैज्ञानिक जुड़ाव के माध्यम से कृषि विस्तार सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य कृषि प्रबंधन और विस्तार प्रशिक्षण संस्थान (SAMETI) के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में, 37 नए नियुक्त अधिकारियों को उनके प्रारंभिक प्रशिक्षण (induction training) के हिस्से के रूप में एक साथ लाया गया। इन अधिकारियों को जल्द ही हिमाचल प्रदेश के विभिन्न ब्लॉकों और जिलों में तैनात किया जाएगा।इस अवसर पर, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. ब्रजेश सिंह ने बेहतर आलू की किस्में विकसित करने और खेती के उन नवीन तरीकों को बढ़ावा देने में संस्थान की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला, जिनसे पूरे देश के किसानों को लाभ होता है। उन्होंने युवा अधिकारियों से आग्रह किया कि वे कृषि संस्थानों के साथ मिलकर काम करें और राज्य के समय विकास के लिए किसान समुदाय के कल्याण में सक्रिय रूप से योगदान दें। समेती के निदेशक डॉ. एस. के. गुप्ता ने जोर देकर कहा कि इस अनुभव यात्रा का मुख्य उद्देश्य आधुनिक आलू अनुसंधान और खेती की उन्नत तकनीकों की व्यावहारिक समझ प्रदान करना था।एक विस्तृत तकनीकी सत्र में केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के विभिन्न विभागों की उपलब्धियों और चल रहे कार्यों को प्रदर्शित किया गया। विभाग प्रमुखों और वैज्ञानिकों-जिनमें डॉ. जगदेव शर्मा (फसल उत्पादन), डॉ. संजीव शर्मा (पादप संरक्षण), डॉ. आलोक कुमार (सामाजिक विज्ञान), श्री रजत सेठी (प्रशासन), डॉ. तनुजा बकसेठ (CI&ST), डॉ. धर्मेंद्र कुमार (CPB&PHT), और डॉ. हेमंत बी. कारडिले (CI&ST) ने अपने-अपने क्षेत्रों से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियों साझा की। विशेषज्ञों ने बीज उत्पादन, फसल और रोग प्रबंधन, भंडारण प्रणालियों, और संस्थान द्वारा विकसित नवीन तकनीकों जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर प्रकाश डाला। इस कार्यक्रम में अनुसंधान संस्थानों से किसानों तक प्रभावी प्रौ‌द्योगिकी हस्तांतरण के महत्व पर भी जोर दिया गया, जो कि कृषि विकास अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।इस संवाद ने नव नियुक्त अधिकारियों को वैज्ञानिकों के साथ सीधे जुड़ने, जमीनी स्तर की चुनौतियों पर चर्चा करने और व्यावहारिक समाधान प्राप्त करने के लिए एक मूल्यवान मंच प्रदान किया। नव नियुक्त अधिकारियों ने कहा कि ऐसे अनुभव कार्यक्रम विस्तार सेवाओं की दक्षता बढ़ाने और अधिकारियों को किसानों को बेहतर परामर्श सहायता प्रदान करने के लिए सशक्त बनाने हेतु अत्यंत आवश्यक है।समेती की उप-प्राचार्य डॉ. सुनीता ठाकुर ने इस कार्यक्रम को सफल बनाने में सहयोग और तकनीकी मार्गदर्शन के लिए संस्थान के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने भविष्य में भी इसी तरह कीक्षमता-निर्माण पहल आयोजित करने के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दोहराया। कार्यक्रम का समापन संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अनिल चौधरी द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।

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