March 23, 2026 6:31 pm

हिमाचल का बजट 2026–27: दिवालियापन छुपाने का दस्तावेज, युवाओं के भविष्य से खुला खिलवाड़ – गौरव कुमार

चिंतपूर्णी,मार्च।स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने हिमाचल प्रदेश के बजट 2026–27 पर तीखा हमला बोलते हुए इसे जनविरोधी, युवा-विरोधी और विकास-विरोधी बजट करार दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इस बजट के माध्यम से अपनी आर्थिक नाकामी को छुपाने की असफल कोशिश की है।गौरव कुमार ने कहा कि बजट के आंकड़े खुद सच्चाई बयान कर रहे हैं। लगभग ₹54,928 करोड़ का बजट, जो पिछले वर्ष से कम है, और ₹6,000 करोड़ से अधिक का राजस्व घाटा यह साफ दिखाता है कि प्रदेश की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर हो चुकी है। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि सरकार के पास न पैसा है, न योजना है और न ही भविष्य का कोई स्पष्ट विजन – यह बजट पूरी तरह से दिशाहीन है।युवाओं के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए गौरव कुमार ने कहा कि इस बजट में सबसे बड़ा अन्याय प्रदेश के युवाओं के साथ हुआ है। रोजगार सृजन के लिए कोई ठोस योजना नहीं है, बेरोजगारी कम करने का कोई रोडमैप नहीं है, और न ही नए उद्योग या स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए कोई बड़ी घोषणा की गई है। उन्होंने कहा, हिमाचल का युवा आज नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है, लेकिन सरकार उसे केवल खोखले वादों से बहला रही है। यह युवाओं के सपनों के साथ सीधा विश्वासघात है।उन्होंने आगे कहा कि बजट का आकार घटाना सीधे तौर पर विकास पर ब्रेक लगाने जैसा है। सड़कों, पर्यटन और उद्योग जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े निवेश की कमी साफ नजर आती है। प्रदेश लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है, लेकिन सरकार के पास इसे कम करने की कोई ठोस रणनीति नहीं है। “यह सरकार विकास नहीं, बल्कि कर्ज और कटौती की राजनीति कर रही है,” उन्होंने कहा।सरकार द्वारा मुख्यमंत्री, मंत्रियों और विधायकों की सैलरी रोकने के फैसले पर भी गौरव कुमार ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब सरकार खुद अपनी सैलरी देने की स्थिति में नहीं है, तो वह प्रदेश को क्या विकास देगी? यह फैसला प्रदेश की गंभीर आर्थिक स्थिति का स्पष्ट संकेत है।किसानों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए की गई घोषणाओं पर भी उन्होंने मिश्रित प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ये केवल कागजी घोषणाएं हैं, जिनके क्रियान्वयन का कोई स्पष्ट प्लान नहीं है।यह बजट घोषणाओं का पुलिंदा है, जिसका जमीन से कोई लेना-देना नहीं,उन्होंने जोड़ा।अंत में गौरव कुमार ने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो हिमाचल को आर्थिक संकट की गहरी खाई में जाना पड़ सकता है। उन्होंने मांग की कि युवाओं के लिए तुरंत रोजगार और स्वरोजगार की ठोस नीति लाई जाए, राज्य की आय बढ़ाने के नए स्रोत विकसित किए जाएं, और उद्योग व पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार किया जाए।यह बजट हिमाचल के उज्जवल भविष्य का नहीं, बल्कि सरकार की नाकामी का आईना है। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में प्रदेश को भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ेगा, जिसका सबसे बड़ा खामियाजा यहां के युवाओं को भुगतना पड़ेगा।

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