शिमला,जून।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई द्वारा आज विश्वविद्यालय परिसर में छात्र हितों से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रशासन एवं प्रदेश सरकार का ध्यान छात्रों की मूलभूत समस्याओं, फीस वृद्धि, प्रदेश में चरमराई कानून व्यवस्था तथा शिक्षण संस्थानों को बंद करने की नीतियों की ओर आकर्षित किया गया।इस अवसर पर इकाई उपाध्यक्ष अंकुश वर्मा ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वर्तमान समय में मात्र तीन बसों के माध्यम से हजारों छात्रों को परिवहन सुविधा उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि बसों की कमी के कारण छात्रों को प्रतिदिन अत्यधिक भीड़ का सामना करना पड़ता है और उन्हें “आलू की बोरियों” की तरह बसों में सफर करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। यह स्थिति छात्रों की सुरक्षा एवं सम्मान दोनों के लिए चिंता का विषय है।उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में उपलब्ध भोजन की गुणवत्ता एवं अत्यधिक दरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि छात्र भारी शुल्क देने के बावजूद गुणवत्तापूर्ण भोजन से वंचित हैं तथा विश्वविद्यालय प्रशासन को इस विषय में तत्काल प्रभाव से उचित कदम उठाने चाहिए।वहीं, इकाई सह सचिव अभिषेक शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा लगातार की जा रही फीस वृद्धि (Fee Hike) का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि शिक्षा को महंगा बनाकर सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा से दूर करने का कार्य कर रही है। उन्होंने मांग की कि छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए बढ़ी हुई फीस को तुरंत वापस लिया जाए।अभिषेक शर्मा ने प्रदेश में लगातार बिगड़ती कानून व्यवस्था पर भी चिंता व्यक्त की तथा कहा कि आए दिन सामने आ रही घटनाएं प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर रही हैं। उन्होंने सरकार से कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने की मांग की।इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में शिक्षण संस्थानों को बंद करने की नीति की भी कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विद्यालयों एवं शिक्षण संस्थानों को बंद करना शिक्षा विरोधी निर्णय है, जिससे विशेषकर ग्रामीण एवं दूरदराज क्षेत्रों के विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित होगा। सरकार को शिक्षा के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण की दिशा में कार्य करना चाहिए, न कि संस्थानों को बंद करने की दिशा में।अभाविप ने चेतावनी दी कि यदि छात्रों की समस्याओं का शीघ्र समाधान नहीं किया गया तो परिषद आने वाले समय में और भी व्यापक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।











