July 14, 2026 10:21 am

नगर निगम अधिनियम के प्रावधानों के विपरीत नगर निगम निधि में हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं : विवेक शर्मा

शिमला,जुलाई। भाजपा प्रदेश सह संयोजक चुनाव प्रकोष्ठ एवं पूर्व नगर निगम पार्षद विवेक शर्मा ने नगर निगमों की वित्तीय व्यवस्था को लेकर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार को नगर निगमों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने का कार्य करना चाहिए, न कि उनकी निधि पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास।विवेक शर्मा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 की धारा 69, धारा 78 (Municipal Fund) तथा धारा 79 (Custody and Investment of Municipal Fund) के प्रावधानों के अनुसार नगर निगम द्वारा लगाए और वसूले जाने वाले कर, शुल्क, फीस तथा अन्य प्राप्तियां नगर निगम निधि (Municipal Fund) का हिस्सा होती हैं। इस निधि का उपयोग नगर निगम के विकास कार्यों, कर्मचारियों के वेतन, नागरिक सुविधाओं तथा अन्य वैधानिक दायित्वों के निर्वहन के लिए किया जाता है।उन्होंने कहा कि यदि नगर निगम की आय को उसके निर्धारित नगर निगम फंड में जमा कराने के बजाय सरकार अपने खाते में जमा कराने का प्रयास करती है, तो यह स्थानीय निकायों की वित्तीय स्वायत्तता और नगर निगम अधिनियम की मूल भावना के विपरीत होगा। सरकार का दायित्व नगर निगमों को आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना है, न कि उनके वित्तीय संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करना।विवेक शर्मा ने कहा कि प्रदेश सरकार स्वयं नगर निगमों को अनुदान देकर उनकी वित्तीय स्थिति मजबूत करे ताकि शहरों में विकास कार्य प्रभावित न हों। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान परिस्थितियों से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार नगर निगमों के संसाधनों का उपयोग अपने वित्तीय प्रबंधन के लिए करना चाहती है, जबकि स्थानीय निकायों की निधि केवल अधिनियम में निर्धारित उद्देश्यों के लिए ही उपयोग की जानी चाहिए।उन्होंने कहा कि सरकार को हिमाचल प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1994 के प्रावधानों का पूर्ण पालन करते हुए नगर निगमों की वित्तीय स्वायत्तता और अधिकारों की रक्षा करनी चाहिए।

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