March 30, 2026 2:53 am

राजकीय संस्कृत महाविद्यालय फागली में वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह का भव्य आयोजन।

शिमला,मार्च।: राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली में आज वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह का गरिमामय एवं उत्साहपूर्ण आयोजन किया गया। इस अवसर पर महाविद्यालय परिसर में विद्या, संस्कृति एवं संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. अमरजीत शर्मा (निर्देशक, उच्चतर शिक्षा, हिमाचल प्रदेश) उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉ. मस्त राम शर्मा (पूर्व सचिव, संस्कृत अकादमी, हिमाचल प्रदेश) ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। इसके अतिरिक्त सारस्वत अतिथि के रूप में डॉ. लोकेंद्र शर्मा जी विशेष रूप से उपस्थित रहे।कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना ने समस्त वातावरण को आध्यात्मिकता एवं श्रद्धा से परिपूर्ण कर दिया। इसके पश्चात महाविद्यालय के प्राचार्य ने मुख्य अतिथियों एवं सभी उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत करते हुए वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। प्रतिवेदन में महाविद्यालय की वर्षभर की शैक्षणिक, सांस्कृतिक एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियों की विस्तृत जानकारी दी गई। उन्होंने बताया कि संस्थान ने शिक्षा के साथ-साथ संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।कार्यक्रम के दौरान विभिन्न शैक्षणिक एवं सह-पाठयक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इनमें वार्षिक परीक्षा में उत्कृष्ट अंक प्राप्त करने वाले छात्र-छात्राओं के साथ-साथ वाद-विवाद, भाषण, निबंध लेखन, श्लोक पाठ, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों एवं खेल-कूद प्रतियोगिताओं में विजेता रहे विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान किए गए। पुरस्कार प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी एवं गर्व स्पष्ट रूप से झलक रहा था, जिसने समारोह को और अधिक जीवंत बना दिया।मुख्य अतिथि डॉ. अमरजीत शर्मा ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा का मूल आधार है। उन्होंने कहा कि संस्कृत के माध्यम से हम अपने प्राचीन ग्रंथों, वेदों एवं शास्त्रों की अमूल्य धरोहर से जुड़ सकते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों को भी मजबूत करें। उन्होंने महाविद्यालय द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह संस्थान प्रदेश में संस्कृत शिक्षा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।विशिष्ट अतिथि डॉ. मस्त राम शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत भाषा विश्व की प्राचीनतम एवं वैज्ञानिक भाषाओं में से एक है। उन्होंने कहा कि आज के युग में भी संस्कृत की प्रासंगिकता बनी हुई है और यह भाषा न केवल आध्यात्मिक बल्कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को संस्कृत के अध्ययन में रुचि बनाए रखने एवं इसे अपने जीवन का अभिन्न अंग बनाने के लिए प्रेरित किया।सारस्वत अतिथि डॉ. लोकेंद्र शर्मा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि संस्कृत शिक्षा के माध्यम से विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, अनुशासन एवं संस्कारों का विकास होता है। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करते हैं और उनमें आत्मविश्वास का संचार करते हैं। उन्होंने महाविद्यालय के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह संस्थान संस्कृत के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने सभी का मन मोह लिया। नृत्य, गीत, नाट्य प्रस्तुति एवं संस्कृत श्लोकों के सुंदर उच्चारण ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। विशेष रूप से संस्कृत नाटिका एवं श्लोक वाचन ने कार्यक्रम को एक नई ऊंचाई प्रदान की। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से विद्यार्थियों ने न केवल अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया, बल्कि भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपरा को भी जीवंत किया।समारोह के अंत में महाविद्यालय के प्राचार्य ने सभी अतिथियों, अध्यापकों, विद्यार्थियों एवं आयोजन में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं।यह वार्षिक पारितोषिक वितरण समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत रहा, बल्कि यह संस्कृत भाषा एवं भारतीय संस्कृति के महत्व को पुनः स्थापित करने का एक सफल प्रयास भी सिद्ध हुआ। कार्यक्रम के सफल आयोजन ने यह सिद्ध कर दिया कि राजकीय संस्कृत महाविद्यालय, फागली शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों एवं सांस्कृतिक मूल्यों के संवर्धन के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।

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