शिमला। हिमाचल प्रदेश में बजट पर चर्चा के दो दिन बाद सीएम सुख मित्र सिंह ने जब बजट पर चर्चा का जवाब दिया। इस दौरान सीएम ने पूर्व बीजेपी सरकार पर सबसे ज्यादा कर्ज लेने का आरोप लगाया। इस पर कड़ी मेहनत की गई और घर में सामान शुरू कर दिया गया। काफी देर बाद सदन में कागजातों को पेश करने का आरोप लगा दिया गया। नेता प्रतिपक्ष अर्थशास्त्री ठाकुर ने कहा कि 3 दिन तक सदन में सदन के अंदर चर्चा हुई। आज सीएम ने सदन में बजट पर जवाब देना शुरू कर दिया, लेकिन चीजों को तोड़ कर तोड़ दिया गया और सदन में रखे गए दस्तावेजों को तोड़ दिया गया। पूर्व सरकार ने लोन लेकर सही आंकड़े पेश नहीं किए थे। इस पर जब डेस्टिनेशन गया तो उसे बोलने का समय नहीं मिला। उन्होंने कहा कि जो कर्ज़ उनकी सरकार द्वारा लिया गया था, उसमें से पूर्व के अनुबंध के लिए दिए गए कर्ज़ की किस्त में ही अधिकांश राशि ब्याज ऋण में खर्च हुआ था। 5 साल में बीजेपी ने सिर्फ 19 हजार 600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया, लेकिन कर्नल की बात है कि प्रदेश की सुक्खू सरकार ने 2 साल में ही 30 हजार करोड़ रुपये का कर्ज लिया है. इसके प्रदेश पर 1 लाख करोड़ का कर्ज हो गया है। अब तक दिए गए कर्ज में 30 फीसदी का लोन केवल सुक्खू सरकार ने लिया है। जयराम ठाकुर ने कहा कि इस तरह के ही दस्तावेज दस्तावेज के तथ्य ठीक नहीं हैं और उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति खराब होने की बात सामने आ सकती है। सीएम को यह स्वीकार करना चाहिए कि आर्थिक स्थिति खराब है और इसे रोजगार की जरूरत है। उन्होंने कहा कि तीन दिन तक बजट पर सार्थक चर्चा हुई है, सत्य पक्ष और सदस्यों ने एकजुटता दिखाई है, लेकिन सीएम ने जब जवाब दिया तो इसमें कोई तथ्य शामिल नहीं है, जो कि बहुमत ने सदन से बाहर कर दिया।












