April 22, 2026 1:48 am

निजी कंपनी का बड़ा अधिकारी चिट्टे की बड़ी खेप के साथ गिरफ्तार।

मंडी। सुंदरनगर उपमंडल में नशा तस्करी के नेटवर्क का एक बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन यूनिट (SIU) ने बीते दिनों 7 ग्राम चिट्टे के साथ मुख्य सप्लायर धर्मेंद्र उर्फ जॉन को गिरफ्तार किया था। अब उसी मामले की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए शुक्रवार को पुलिस ने बिलासपुर रेलवे प्रोजेक्ट में कार्यरत एक निजी कंपनी के मैनेजर को भी गिरफ्तार कर लिया है, जिसकी पहचान अनुज ठाकुर निवासी गांव व डाकघर कलौहड़, तहसील सुंदरनगर के रूप में हुई है।जानकारी के अनुसार, धर्मेंद्र उर्फ जॉन गिरफ्तारी से ठीक एक रात पहले आरोपी मैनेजर अनुज के पास रुका था। वहीं से वह अगली सुबह नशे की खेप लेकर बस के माध्यम से सुंदरनगर के लिए रवाना हुआ थाभवाना के पास पुलिस ने उसे दबोच लिया। जब पुलिस ने मुख्य आरोपी के मोबाइल और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच की, तो अनुज ठाकुर के साथ उसके नियमित संपर्क और पैसों के लेन-देन की पुष्टि हुई।पुलिस सूत्रों की मानें तो अनुज ठाकुर न केवल चिट्टे की तस्करी में धर्मेंद्र की मदद कर रहा था, बल्कि खुद भी इसके सेवन में शामिल था। यही नहीं, धर्मेंद्र के माध्यम से वह अन्य लोगों तक भी नशे की खेप पहुंचाता था। इसी आधार पर पुलिस की एसआईयू टीम ने शुक्रवार को बिलासपुर स्थित उसके ठिकाने से उसे हिरासत में लिया और बाद में उसे सुंदरनगर थाना के हवाले कर दिया गया।मामले की पुष्टि करते हुए एसपी मंडी साक्षी वर्मा ने बताया कि पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रबंधक अनुज ठाकुर भी नशे के इस नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।दोनों आरोपियों के बीच हुए बैंक ट्रांजैक्शन और मोबाइल डिटेल्स की गहराई से जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस मामले में और भी नाम सामने आ सकते हैं और पुलिस की टीमें इनसे जुड़े अन्य लोगों बहरहाल, इस कार्रवाई से यह साफ हो गया है कि नशे का जाल केवल तस्करों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सफेदपोश और पढ़े-लिखे लोग भी शामिल हो सकते हैं। पुलिस की सक्रियता और जांच से यह उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।की पहचान में जुटी हुई हैं।नशे की खेप के पीछे छिपे आर्थिक लेन-देन की परतें खोलने के लिए पुलिस ने आरोपियों के बैंक खातों की जांच भी शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि किस-किस माध्यम से पैसों का लेन-देन किया गया और इस नेटवर्क से और कौन-कौन जुड़े हो सकते हैं। पुलिस को शक है कि मामला एक संगठित गिरोह का हिस्सा हो सकता है जो लंबे समय से नशा तस्करी में संलिप्त है।

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