April 25, 2026 12:39 pm

एनईपी 2020 की पांचवीं वर्षगांठ पर भारत मंडपम में हुआ अखिल भारतीय शिक्षा समागम।

शिमला।नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की पांचवीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य पर आज भारत मंडपम, नई दिल्ली में अखिल भारतीय शिक्षा समागम 2025 का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्री, शिक्षाविद, नीति निर्माता, शिक्षकों के प्रतिनिधि, उद्योग जगत के विशेषज्ञ और अधिकारी एक मंच पर एकत्र हुए। समागम का उद्घाटन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने किया।हिमाचल प्रदेश की ओर से इस समागम में शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने भाग लिया। इस दौरान समग्र शिक्षा हिमाचल के निदेशक राजेश शर्मा और उच्च शिक्षा निदेशक डॉ अमरजीत शर्मा भी उपस्थित रहे। इसमें  बीते पांच वर्षों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत हुई प्रगति की समीक्षा की गई और  भावी रणनीतियों पर भी चर्चा की गई।

*हिमाचल के स्कूलों में कार्यक्रम का किया गया लाइव प्रसारण*

शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस अवसर पर शिक्षा नीति के प्रभावों और राज्य स्तर पर इसके क्रियान्वयन से जुड़े अनुभव साझा किए।  इस कार्यक्रम को हिमाचल के विभिन्न पीएम श्री स्कूलों में लाइव प्रसारित किया गया, जिसे छात्रों, शिक्षकों के साथ-साथ स्थानीय विधायकों ने उत्साहपूर्वक देखा और इस महत्वपूर्ण शैक्षणिक संवाद का साक्षी बने। इससे राज्य के दूरदराज़ क्षेत्रों तक भी इस समागम की उपयोगी जानकारी पहुंच सकी।समागम में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के विविध पहलुओं पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तार से चर्चा की गई। समागम के पहले सत्र में “शिक्षण-अधिगम में भारतीय भाषाओं का प्रयोग” विषय पर मंथन हुआ। इस सत्र में भाषा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और स्कूल शिक्षा के क्षेत्र में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों ने  भारतीय भाषाओं के महत्व और शिक्षा की प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं में उनके प्रभावी उपयोग पर विचार रखे। उन्होंने मातृभाषा आधारित शिक्षण को सीखने की प्रक्रिया को सरल, सशक्त और सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुआ बताया।दूसरे सत्र में “अनुसंधान और प्रधानमंत्री अनुसंधान अध्येता (PMRF): भारत की अगली पीढ़ी के शैक्षणिक और औद्योगिक नेतृत्व का पोषण” विषय पर विमर्श हुआ। इसमें देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने  उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा देने, उद्योग से जुड़ी चुनौतियों को अनुसंधान के माध्यम से हल करने तथा नवाचार के अवसरों को पहचानने और आगे बढ़ाने पर बल दिया। प्रधानमंत्री अनुसंधान फेलोशिप जैसे कार्यक्रमों को इस दिशा में प्रभावी पहल बताया गया।तीसरे सत्र में “2030 तक शत-प्रतिशत जीईआर प्राप्त करने के लिए माध्यमिक शिक्षा की पुनर्कल्पना” विषय पर चर्चा की गई। इस सत्र में माध्यमिक शिक्षा को अधिक समावेशी, लचीला और व्यावहारिक बनाने के तरीकों पर विचार किया गया ताकि हर बच्चा स्कूल प्रणाली में बना रह सके और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सके। सत्र में नीति निर्माताओं के साथ-साथ जमीनी अनुभव रखने वाले स्कूल प्राचार्यों और राज्य परियोजना निदेशकों ने भाग लेकर अपने अनुभव साझा किए।चौथे सत्र में “शिक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में उत्कृष्टता केंद्र – शिक्षण और अधिगम पारिस्थितिकी तंत्र में बदलाव” विषय पर विचार हुआ। इस सत्र में आईआईटी, डेटा साइंस और तकनीकी स्टार्टअप से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। यह सत्र शिक्षा को भविष्य के अनुरूप डिजिटल और तकनीकी दृष्टि से सक्षम बनाने की दिशा में महत्त्वपूर्ण रहा।समापन सत्र में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार, जयंत चौधरी और अंत में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने संबोधन दिया। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 को भारत के शैक्षिक परिवर्तन की आधारशिला बताते हुए इसके व्यापक प्रभावों की सराहना की। उन्होंने यह भी कहा कि शिक्षा को भारतीयता, नवाचार और समावेश के मूल्यों के साथ जोड़ते हुए इसे वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप विकसित किया जा रहा है। इस बात पर जोर दिया गया कि नई शिक्षा नीति के अंतर्गत भारत शिक्षा के क्षेत्र में समानता, उत्कृष्टता और नवाचार की ओर तेजी से अग्रसर है। नीति के इन मूल तत्वों को समागम में गहराई से समझा गया और उन्हें आगे बढ़ाने की रणनीतियाँ बनाई गईं।

Leave a Comment

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!