April 22, 2026 3:14 pm

राज्य में बिजली के उत्पादन पर भी इसका लगातार असर,बिजली खरीद कर रहा गुजारा।

शिमला,अगस्त।हिमाचल प्रदेश में बरसात के चलते हो रही प्राकृतिक आपदा से जहां जनजीवन अस्त व्यस्त हो चुका है, वहीं राज्य में बिजली के उत्पादन पर भी इसका लगातार असर पड़ रहा है। हिमाचल प्रदेश में आए दिन कोई न कोई बिजली परियोजना भारी सिल्ट आने की वजह से बंद हो रही है। वर्तमान में भी प्रदेश की खड्डों पर बनी छोटी बिजली परियोजनाओं को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसके चलते राज्य बिजली बोर्ड लिमिटेड को रोजाना उत्तरी ग्रिड से बिजली खरीद कर गुजारा करना पड़ रहा है। हालांकि पड़ोसी राज्य पंजाब को बैंकिंग माध्यम से जो बिजली हिमाचल को इस सीजन में देनी है, उसकी आपूर्ति लगातार की जा रही है, मगर अपनी जरूरत को पूरा करने के लिए बिजली बोर्ड को रोजाना 30 लाख यूनिट बिजली की खरीद भी करनी पड़ रही है। बताया जा रहा है कि कभी एक परियोजना, तो कभी तीन से चार परियोजनाओं में बिजली उत्पादन ठप होने की वजह से बिजली बोर्ड को उत्तरी ग्रिड से बिजली खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। जानकारी के अनुसार बिजली बिजली बोर्ड को परियोजनाओं के प्रभावित होने से इस सीजन में भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह दौर ऐसे ही जारी रहता है, तो इस बार बोर्ड को करोड़ों रुपए का नुकसान उठाना पड़ेगा। सितंबर महीने की शुरुआत हो रही है और 15 अक्तूबर तक ही हिमाचल प्रदेश में बिजली का अधिकांश उत्पादन रहता है,15 अक्तूबर के बाद प्रदेश में धीरे-धीरे बिजली उत्पादन घटना शुरू हो जाता है और फिर सर्दियों में बैंकिंग के माध्यम से दूसरे राज्यों से बिजली खरीदनी पड़ती है। सूत्रों के अनुसार हिमाचल प्रदेश इस समय पंजाब को पिछली सर्दियों में ली गई बिजली की वापसी कर रहा है और उसका यह टारगेट था कि 15 अक्तूबर तक वह अतिरिक्त बिजली पंजाब को देगा, ताकि सर्दियों में उसे अतिरिक्त बिजली की वापसी हो सके। बैंकिंग प्रणाली के इस एग्रीमेंट के तहत हिमाचल प्रदेश दिल्ली व उत्तर प्रदेश को भी बिजली देता है। पिछले महीने बिजली बोर्ड ने दिल्ली और उत्तर प्रदेश को बिजली बेची है। वहीं, इस बार बारिश का स्पेल काफी लंबा हो गया है और नदियों और खड्डों में ज्यादा मात्रा में सिल्ट आ रही है, जिसकी वजह से बिजली उत्पादन में भी दिक्कतें पेश आ रहे हैं। बता दें कि हिमाचल पावर कॉरपोरेशन की सहज परियोजना जो कि रोजाना 100 मेगावाट बिजली का उत्पादन करती है, वह पिछले डेढ़ महीने से बंद पड़ी है, जिसका भी नुकसान सरकार को उठाना पड़ रहा है। जिन बिजली परियोजनाओं में उत्पादन के बाद रॉयल्टी के रूप में सरकार को बिजली दी जाती है, वहां से भी रॉयल्टी की हिस्सेदारी में कमी देखी जा रही है जिससे सरकार को भी नुकसान उठाना पड़ेगा।

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