शिमला,जुलाई। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बलबीर वर्मा ने मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू द्वारा राजभवन के बाहर देर रात धरना देने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार है कि प्रदेश का मुख्यमंत्री स्वयं अपनी ही संवैधानिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगाते हुए रात आठ बजे राजभवन के बाहर धरना देने बैठ गया। यह प्रदेश की गरिमा, मुख्यमंत्री पद की मर्यादा और लोकतांत्रिक परंपराओं के विपरीत है।बलबीर वर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री को प्रदेश की जनता ने धरना देने के लिए नहीं, बल्कि शासन चलाने के लिए चुना है। यदि प्रदेश का मुख्यमंत्री स्वयं धरने पर बैठ जाए तो यह उसकी प्रशासनिक विफलता का सबसे बड़ा प्रमाण है। पिछले ढाई वर्षों में कांग्रेस सरकार प्रदेश के आर्थिक संकट, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था, कर्मचारियों के लंबित देयकों, किसानों-बागवानों की समस्याओं और विकास कार्यों को लेकर पूरी तरह विफल रही है। अब जनता का ध्यान इन असफलताओं से हटाने के लिए भावनात्मक और राजनीतिक ड्रामा किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि मुख्यमंत्री को आखिर ऐसी क्या मजबूरी आ गई कि उन्हें रात के समय राजभवन के बाहर धरना देना पड़ा। क्या प्रदेश में इतने गंभीर जनहित के मुद्दे समाप्त हो गए हैं कि मुख्यमंत्री अब केवल कांग्रेस नेतृत्व के राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने में लगे हैं? मुख्यमंत्री और उनका पूरा मंत्रिमंडल आज हिमाचल प्रदेश की जनता की चिंता छोड़कर केवल एक परिवार—गांधी परिवार—को खुश करने की राजनीति कर रहा है। राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन में उतरकर मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी पहली प्राथमिकता हिमाचल नहीं बल्कि कांग्रेस हाईकमान है।बलबीर वर्मा ने कहा कि प्रदेश की जनता पूछ रही है कि जिन महिलाओं से ₹1,500 प्रतिमाह देने का वादा किया गया, उनका क्या हुआ? 5 लाख रोजगार का वादा कहां गया? 300 यूनिट मुफ्त बिजली का वादा क्यों पूरा नहीं हुआ? कर्मचारियों, पेंशनरों, किसानों और बागवानों के लंबित मुद्दों का समाधान क्यों नहीं हुआ? इन प्रश्नों का उत्तर देने के बजाय मुख्यमंत्री राजनीतिक नौटंकी कर रहे हैंउन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व देशभर में ऐसे आंदोलनों का समर्थन कर रहा है जिनसे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो रही है। मुख्यमंत्री भी उसी राजनीति का हिस्सा बनकर राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन में उतर गए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह समझना चाहिए कि उनका दायित्व किसी एक राजनीतिक परिवार के प्रति नहीं बल्कि हिमाचल प्रदेश की लगभग 75 लाख जनता के प्रति है।बलबीर वर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी लगातार ऐसे राजनीतिक वातावरण का निर्माण कर रही है जिससे समाज में टकराव और भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो। मुख्यमंत्री का राजभवन के बाहर धरना इसी राजनीति का हिस्सा है। राज्य का संवैधानिक प्रमुख राजभवन है और मुख्यमंत्री का दायित्व संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना है, न कि राजनीतिक दबाव बनाने के लिए उन्हें विवाद का केंद्र बनाना।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार पूरी तरह दिशाहीन हो चुकी है। प्रदेश के विकास, निवेश, रोजगार, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे विषय पीछे छूट चुके हैं, जबकि सरकार का पूरा ध्यान केवल गांधी परिवार की राजनीतिक लड़ाई लड़ने में लगा हुआ है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्री दिल्ली की राजनीति में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जबकि हिमाचल प्रदेश की जनता बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है।बलबीर वर्मा ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी स्पष्ट करना चाहती है कि वह लोकतांत्रिक मूल्यों, संवैधानिक संस्थाओं और राष्ट्रहित के साथ सदैव खड़ी रही है। मुख्यमंत्री को राजनीतिक नाटक करने के बजाय प्रदेश के शासन पर ध्यान देना चाहिए। हिमाचल की जनता कांग्रेस सरकार की विफलताओं को भली-भांति समझ चुकी है और आने वाले समय में इसका लोकतांत्रिक उत्तर अवश्य देगी।










