ला सितम्बर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने हिमाचल प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि प्रदेश में तथाकथित “व्यवस्था परिवर्तन” के नाम पर शिक्षा, स्वास्थ्य और वित्तीय प्रबंधन तीनों मोर्चों पर अव्यवस्था बढ़ी है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू वर्ष 2032 तक हिमाचल को आत्मनिर्भर बनाने के बड़े दावे कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है।डॉ. बिंदल ने कहा कि सरकारी स्कूलों की हालत चिंताजनक है। अनेक विद्यालय सिंगल टीचर व्यवस्था से जूझ रहे हैं और कई स्थानों पर पर्याप्त अध्यापक उपलब्ध नहीं हैं। एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं के बच्चों को पढ़ाना पड़ रहा है। दूसरी ओर बड़ी संख्या में शैक्षणिक संस्थानों को बंद किया गया, लेकिन जो स्कूल चल रहे हैं वहां भी भवन, शिक्षक, शौचालय, पीने के पानी और अन्य मूलभूत सुविधाओं की कमी बनी हुई है।उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला है। कक्षा 9वीं और 11वीं की पंजीकरण फीस ₹50 से बढ़ाकर ₹200 कर दी गई, यानी 300 प्रतिशत की वृद्धि। इसी प्रकार लेट फीस ₹100 से बढ़ाकर ₹500 कर दी गई, जो 400 प्रतिशत की वृद्धि है। मुफ्त वर्दी और परिवहन से जुड़ी सुविधाओं में कटौती ने भी परिवारों की परेशानी बढ़ाई है।डॉ. बिंदल ने आरोप लगाया कि सरकार एक तरफ सरकारी शिक्षा को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन दूसरी तरफ ऐसी परिस्थितियां पैदा कर रही है जिनमें गरीब परिवार के लिए सरकारी स्कूल में बच्चे को पढ़ाना भी कठिन होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि स्कूल में शिक्षक नहीं होगा, भवन नहीं होगा, मूलभूत सुविधाएं अधूरी होंगी और फीस भी बढ़ेगी, तो सरकार के शिक्षा सुधार के दावे स्वतः ही खोखले साबित होते हैं।उन्होंने CBSE और अंग्रेजी माध्यम लागू करने के फैसलों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी बड़े शैक्षणिक परिवर्तन से पहले पर्याप्त तैयारी, शिक्षक प्रशिक्षण और संसाधनों की व्यवस्था जरूरी है। बिना तैयारी बच्चों पर प्रयोग करना उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।डॉ. बिंदल ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की स्थिति भी बेहतर नहीं है। अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में डॉक्टरों तथा विशेषज्ञों की कमी है और कई स्थानों पर CT Scan, Ultrasound तथा अन्य जांच सुविधाओं को लेकर जनता परेशान है।उन्होंने कहा कि हालिया CAG रिपोर्ट ने भी राज्य सरकार के वित्तीय प्रबंधन पर गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। बढ़ता कर्ज, वित्तीय अनुशासन की कमी और विकास कार्यों की धीमी गति के बीच 2032 में आत्मनिर्भर हिमाचल का दावा जनता को गुमराह करने वाला है।डॉ. बिंदल ने कहा कि भाजपा कांग्रेस सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ लगातार संघर्ष करेगी। पार्टी ने तय किया है कि प्रदेश के 171 मंडलों सहित करीब 200 स्थानों पर हर महीने स्थानीय मुद्दों को लेकर धरने-प्रदर्शन किए जाएंगे।उन्होंने कहा कि शिक्षा की बदहाली, स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी, बढ़ती फीस, बंद होते संस्थान और वित्तीय कुप्रबंधन कांग्रेस सरकार के तथाकथित व्यवस्था परिवर्तन की असली पहचान बन चुके हैं। भाजपा सदन से सड़क तक जनता की आवाज उठाती रहेगी।












