April 29, 2026 1:48 am

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में “विकसित भारत 2047” पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन।

शिमला,अप्रैल। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में “विकसित भारत 2047: चुनौतियाँ और अवसर” विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आज सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह संगोष्ठी 27 एवं 28 अप्रैल 2026 को सिद्धार्थ विहार परिसर में आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न भागों से आए शिक्षाविदों, नीति विशेषज्ञों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया।संगोष्ठी का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के राष्ट्रीय लक्ष्य के संदर्भ में समावेशी, सतत एवं बहु-विषयी विकास के विभिन्न आयामों पर विचार-विमर्श करना रहा। उद्घाटन सत्र में संगोष्ठी के संयोजक एवं महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित द्वारा विषय की रूपरेखा प्रस्तुत की गई, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रो. आर. के. मिश्रा ने भारत के विकास पथ की चुनौतियों एवं संभावनाओं पर अपने विचार व्यक्त किए। सत्र की अध्यक्षता संस्थान के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी द्वारा की गई, जिन्होंने विकसित भारत 2047 की अवधारणा को व्यापक राष्ट्रीय संकल्प के रूप में रेखांकित किया।दो दिनों तक आयोजित विभिन्न सत्रों में विकसित भारत की अवधारणा के विविध आयामों पर गहन विमर्श किया गया। प्रथम दिवस के सत्रों में “विकसित भारत की आधारभूत अवधारणा: प्रधानमंत्री की दृष्टि” तथा “भारत की अर्थव्यवस्था और भविष्य” जैसे विषयों पर चर्चा हुई। इन सत्रों में गुजरात विश्वविद्यालय, अहमदाबाद की कुलपति प्रो. नीरजा गुप्ता, कर्मेल कॉलेज फॉर वुमेन, गोवा के प्रो. मनोज बोरकर, ओ.पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी के प्रो. पंकज गुप्ता तथा कंसोर्टियम फॉर एजुकेशनल कम्युनिकेशन (सीईसी), दिल्ली के निदेशक प्रो. पी. एस. मनहास सहित अनेक विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। द्वितीय दिवस के सत्रों में “नीति एवं प्रशासन”, “विकास की सनातन दृष्टि” तथा “विकसित भारत का समग्र विजन” जैसे विषयों पर विचार-विमर्श किया गया। इन सत्रों में महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय, बीकानेर के कुलपति प्रो. मनोज दीक्षित, राजभवन, राजस्थान, जयपुर से डॉ. राजेश व्यास, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, शिमला के प्रो. विवेकानंद तिवारी, तथा अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से आए विशेषज्ञों ने सहभागिता की। साथ ही वाणिज्य मंत्रालय, नई दिल्ली, दिल्ली विश्वविद्यालय एवं अन्य संस्थानों से जुड़े विद्वानों द्वारा भी महत्वपूर्ण प्रस्तुतियाँ दी गईं।समापन सत्र में संगोष्ठी के संयोजक प्रो. मनोज दीक्षित ने दो दिवसीय कार्यवाही का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया, जिसमें विभिन्न सत्रों के प्रमुख निष्कर्षों और सुझावों को संक्षेप में रखा गया। इसके पश्चात भगत फूल सिंह महिला विश्वविद्यालय, हरियाणा की पूर्व कुलपति प्रो. सुषमा यादव ने अपने समापन उद्बोधन में कहा कि विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल नीतिगत दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि शिक्षा, नवाचार, और संस्थागत सुदृढ़ता के माध्यम से भी प्राप्त किया जा सकता है। समापन सत्र का संचालन जनसंपर्क अधिकारी डॉ अखिलेश पाठक ने किया।संगोष्ठी के दौरान यह स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने के लिए बहु-विषयी दृष्टिकोण, समन्वित नीति निर्माण तथा समाज के विभिन्न वर्गों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। विभिन्न सत्रों में प्रस्तुत विचारों ने इस दिशा में ठोस मार्गदर्शन प्रदान किया।यह संगोष्ठी देश के विभिन्न भागों से आए शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों के लिए एक प्रभावी मंच सिद्ध हुई, जहाँ उन्होंने अपने अनुभवों और शोध आधारित दृष्टिकोणों को साझा करते हुए विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु सार्थक सुझाव प्रस्तुत किए।

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