July 21, 2026 11:04 pm

पहाड़ी राज्यों के पर्यावरण संरक्षण के लिए केंद्र सरकार की बहुआयामी कार्ययोजना, हिमाचल को मिल रहा विशेष लाभ : सुरेश कश्यप

शिमला,जुलाई। शिमला संसदीय क्षेत्र से सांसद सुरेश कश्यप द्वारा लोकसभा में हिमालयी एवं पहाड़ी राज्यों, विशेषकर हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, नदी पुनर्जीवन तथा जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा बनाई गई विशेष कार्ययोजना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया गया। इस पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री श्री कीर्तिवर्धन सिंह ने विस्तृत उत्तर देते हुए बताया कि केंद्र सरकार हिमालयी राज्यों के संवेदनशील पर्यावरण की सुरक्षा के लिए अनेक ठोस एवं दीर्घकालिक कदम उठा रही है। सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि हिमाचल प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों में पर्यावरण संरक्षण केवल प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आजीविका, पर्यटन, कृषि, बागवानी और भावी पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से उन्होंने लोकसभा में यह प्रश्न उठाया ताकि हिमाचल प्रदेश को मिल रही पर्यावरणीय योजनाओं और सहायता की विस्तृत जानकारी देश के सामने आ सके। केंद्रीय मंत्री ने अपने उत्तर में बताया कि केंद्र सरकार ने ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम-2026 लागू किए हैं, जिनमें विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों के लिए वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन के अलग मानदंड निर्धारित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने पहाड़ी क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर सभी राज्यों एवं संबंधित विभागों को भेजे हैं। मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) के अंतर्गत हिमाचल प्रदेश के बद्दी, दमताल, काला अंब, नालागढ़, पांवटा साहिब, परवाणू और सुंदरनगर सहित सात गैर-प्राप्ति (Non-Attainment) शहरों के लिए विशेष कार्ययोजनाएं लागू की गई हैं। वर्ष 2019-20 से 2025-26 के दौरान इन शहरों में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए 25.73 करोड़ रुपये का प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन अनुदान प्रदान किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रीय जल गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत हिमाचल प्रदेश में 250 स्थानों पर जल गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जा रही है, जिनमें 156 नदियां एवं जलाशय शामिल हैं। राज्य में प्रदूषित नदी क्षेत्रों के लिए विशेष पर्यावरणीय कार्ययोजनाएं तैयार की गई हैं तथा उनकी नियमित समीक्षा मुख्य सचिव स्तर पर की जा रही है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि बढ़ते पर्यटन एवं जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न चुनौतियों को देखते हुए केंद्र सरकार राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों के अनुरूप हिमालयी क्षेत्रों के लिए पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों को लागू कर रही है। सड़क, भवन एवं अन्य विकास परियोजनाओं में भूस्खलन प्रबंधन, सीवेज उपचार संयंत्र, जलग्रहण क्षेत्र विकास, पर्यावरण प्रबंधन योजना, वन संरक्षण, वन्यजीव संरक्षण, हरित क्षेत्र विकास, मलबा प्रबंधन तथा बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली जैसे उपाय अनिवार्य किए गए हैं।उत्तर में यह भी स्पष्ट किया गया कि केंद्र सरकार राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (NAPCC) के माध्यम से हिमाचल प्रदेश सहित सभी राज्यों में जलवायु परिवर्तन से निपटने की रणनीति पर कार्य कर रही है। हिमाचल प्रदेश ने अपनी राज्य जलवायु परिवर्तन कार्ययोजना (SAPCC) तैयार कर ली है, जबकि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राष्ट्रीय हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र मिशन (NMSHE) भी संचालित किया जा रहा है। साथ ही पर्यटन मंत्रालय द्वारा ‘ट्रैवल फॉर लाइफ (Travel for LiFE)’ अभियान के माध्यम से सतत एवं पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। सांसद सुरेश कश्यप ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करते हुए हिमालयी राज्यों के लिए दीर्घकालिक एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य कर रही है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इन योजनाओं से हिमाचल प्रदेश में स्वच्छ पर्यावरण, सुरक्षित नदियां, बेहतर वायु गुणवत्ता तथा प्राकृतिक आपदाओं से निपटने की क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी।

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!