September 9, 2026 4:16 am

शपथ पत्र ₹20 से ₹100 और पावर ऑफ अटॉर्नी ₹1000 से ₹1500—महंगाई की मार के बीच सुक्खू सरकार ने जनता पर डाला एक और आर्थिक बोझ

उना। स्वामी विवेकानंद सेवा ट्रस्ट चिंतपूर्णी के अध्यक्ष गौरव कुमार ने स्टांप शुल्क में की गई बढ़ोतरी को लेकर सुक्खू सरकार पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने सत्ता में आने से पहले जनता को राहत, रोजगार और व्यवस्था परिवर्तन के बड़े-बड़े सपने दिखाए थे, लेकिन सत्ता में आने के बाद आम जनता को राहत देने के बजाय एक के बाद एक नए आर्थिक बोझ का सामना करना पड़ रहा है।गौरव कुमार ने कहा कि शपथ पत्र का शुल्क ₹20 से बढ़ाकर सीधे ₹100 करना पांच गुना बढ़ोतरी हैइसी प्रकार पावर ऑफ अटॉर्नी का शुल्क ₹1000 से बढ़ाकर ₹1500 किया गया हैउन्होंने सवाल किया कि जब प्रदेश का आम नागरिक पहले ही महंगाई और आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा है, तो सरकार को ऐसी फीस बढ़ाने की जरूरत क्यों महसूस हुईउन्होंने कहा कि सरकार के लिए यह केवल कुछ रुपये की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन आम नागरिक के लिए हर सरकारी दस्तावेज, प्रमाण-पत्र और कानूनी प्रक्रिया पर बढ़ने वाला खर्च उसके मासिक बजट पर सीधा असर डालता है। सरकार को यह समझना होगा कि जनता की जेब असीमित नहीं है।गौरव कुमार ने कहा कि ऊना जैसे ग्रामीण बहुल जिले में किसान, मजदूर, छोटे व्यापारी, युवा, कर्मचारी और सामान्य परिवार बड़ी संख्या में सरकारी एवं राजस्व संबंधी दस्तावेजी प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं। ऐसे में दस्तावेजों के शुल्क में बढ़ोतरी का असर सीधे आम परिवारों तक पहुंचता है।गौरव कुमार ने कांग्रेस सरकार से सवाल किया कि चुनावों से पहले जिस ‘व्यवस्था परिवर्तन’ की बात की गई थी, उसका लाभ आखिर जनता को कहां मिल रहा है? उन्होंने कहा कि अगर सरकार का हर नया फैसला जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालने वाला होगा, तो प्रदेश की जनता स्वाभाविक रूप से सवाल पूछेगी कि यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन है?उन्होंने कहा कि सरकार को अपनी आर्थिक नीतियों की प्राथमिकताओं पर पुनर्विचार करना चाहिए। सरकार का काम जनता की परेशानियां कम करना है, सरकारी प्रक्रियाओं की कीमत बढ़ाकर परेशानियां बढ़ाना नहीं।गौरव कुमार ने कहा कि यदि स्टांप शुल्क के दुरुपयोग या किसी विशेष श्रेणी में अनियमितता की समस्या है तो सरकार संबंधित मामलों में कार्रवाई करे, लेकिन उसके समाधान के नाम पर सामान्य नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि प्रदेश का युवा रोजगार के अवसरों की तलाश में है, किसान और बागवान अपनी आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं और मध्यम वर्ग महंगाई के दबाव में है। ऐसे समय में आवश्यक दस्तावेजों की फीस बढ़ाना सरकार की प्राथमिकताओं पर गंभीर सवाल खड़े करता है।गौरव कुमार ने कहा कि कांग्रेस सरकार को अब विज्ञापनों और नारों से बाहर निकलकर जमीन पर जनता को राहत देने की जरूरत है। जनता यह देख रही है कि सरकार के फैसलों से उसकी जेब पर कितना असर पड़ रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि आम नागरिकों पर आर्थिक बोझ बढ़ाने वाले ऐसे फैसलों से सरकार को कितना अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा और इस फैसले का वास्तविक लाभ किसे मिलेगा।गौरव कुमार ने सुक्खू सरकार से मांग की कि शपथ पत्र सहित आम जनता से सीधे जुड़े दस्तावेजों की बढ़ाई गई फीस पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए और अनावश्यक आर्थिक बोझ को वापस लिया जाए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने जनता की आवाज को अनसुना किया तो आने वाले समय में जनता लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगी।

 

 

 

 

 

 

 

और पढ़ें

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें

error: Content is protected !!