April 21, 2026 8:59 pm

राज्य में महिलाओं को बस किराए में दी जा रही 50 फीसदी की छूट बंद नहीं।

शिमला।राज्य में महिलाओं को बस किराए में दी जा रही 50 फीसदी की छूट बंद नहीं की जाएगी। इस तरह का कोई प्रोपोजल नहीं है। सरकार ने बस किराए में बढ़ोतरी केवल एचआरटीसी और प्राइवेट ऑपरेटरों को राहत देने के लिए की है, जो कि जरूरी थी। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्रिहोत्री ने कहा कि एचआरटीसी की आर्थिक हालत ठीक नहीं है, लिहाजा उसे राहत देना जरूरी था। पूर्व की जयराम सरकार में बस किराए में कुल 46 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, लेकिन उसके बाद से कभी किराया नहीं बढ़ा, जबकि दूसरे राज्यों में किराया अधिक है। महिलाओं को दी जा रही छूट जारी रहेगी। मुकेश अग्निहोत्री ने बताया कि इसको लेकर अभी तक न तो कोई चर्चा हुई है और न ही कोई प्रस्ताव तैयार किया गया है।उन्होंने कहा कि 19 मई को होने वाली राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में भी इस संबंध में कोई प्रस्ताव नहीं लाया जा रहा है। न्यूनतम बस किराया 10 रुपए करने व बस किराए में 15 फीसदी की बढ़ोतरी के बाद यह चर्चा थी कि सरकार महिलाओं को दी जाने वाली छूट को भी बंद कर देगी, लेकिन इन अटकलों पर उपमुख्यमंत्री ने विराम लगा दिया है। यहां बता दें कि प्राइवेट ऑपरेटर भी इस तरह की मांग कर रहे हैं जिनका कहना है कि किराया बढ़ोतरी से उनको लाभ नहीं है, लेकिन महिलाओं को दी जा रही छूट का असर पड़ सकता है जिसपर सरकार को सोचना चाहिए, मगर सरकार इस दिशा में विचार नहीं रखती। एचआरटीसी का कुल घाटा 2200 करोड़ है।निगम का प्रति किलोमीटर बस संचालन का खर्चा करीब 80 रुपए है, जबकि आय बेहद कम है। प्रदेश सरकार एचआरटीसी को सालाना करीब 700 करोड़ रुपए की ग्रांट देती है। सरकार का प्रयास है कि निगम की माली हालत सुधार कर ग्रांट कम करे। इसके मद्देनजर सरकार ने किराए में बढ़ोतरी की है। इसके अलावा कई सुधारात्मक कदम भी उठाए हैं। इससे पहले एचआरटीसी निदेशक मंडल की बैठक में निजी स्कूलों के बस पास की दरें दोगुनी करने और रियायती कार्ड की दरें दोगुनी कर वैधता अवधि दो साल से घटा कर एक साल करने का निर्णय ले चुकी है। हालांकि निगम प्रबंधन के प्रयासों से आय में बढ़ोतरी होनी शुरू हुई है। बीते सालों के मुकाबले इस साल निगम की मासिक कमाई बढ़ी है। मगर अभी उसे सरकार की ग्रांट पर निर्भर रहना पड़ता है तभी वह अपने कर्मचारियों को वेतन और पेंशनधारियों को पेंशन दे पाता है। अभी कई कर्मचारी ऐसे हैं जो रिटायर हो गए हैं लेकिन इसके बाद भी पेंशन लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहे हैं।

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