July 22, 2026 9:12 am

शिमला में आपदाओं, विकास और जलवायु संकट पर सामुदायिक संवाद आयोजित।

शिमला,सितम्बर। शिमला के मॉल रोड स्थित YWCA में हिमाचल ज्ञान विज्ञान समिति (HGVS) द्वारा आपदाओं, विकास और जलवायु संबंधी चिंताओं पर एक सामुदायिक संवाद आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में 55 प्रतिभागियों ने भाग लिया, जिनमें विशेषज्ञ, तकनीकी अधिकारी, इंजीनियर, वन अधिकारी, डॉक्टर, समाजशास्त्री और समुदाय प्रतिनिधि शामिल थे। इस संवाद का उद्देश्य एक साझा मंच प्रदान करना था जहाँ लोग मिलकर चिंतन और चर्चा कर सकें।हाल के समय में हिमाचल प्रदेश लगातार प्राकृतिक आपदाओं से जूझ रहा है। तेज बारिश, भूस्खलन और अन्य आपदाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। अब तक 341 लोगों की जान जा चुकी है और लगभग ₹4000 करोड़ का नुकसान दर्ज किया गया है।इस स्थिति ने कई अहम सवाल खड़े किए हैं — इसमें कितना योगदान वैश्विक जलवायु परिवर्तन का है, और कितना स्थानीय नीतियों, योजनाओं और विकास की प्राथमिकताओं का? हालांकि इन सवालों के सभी जवाब अभी स्पष्ट नहीं हैं, लेकिन इस संवाद के ज़रिए इन मुद्दों पर विचार-विमर्श की एक शुरुआत हुई।यह चर्चा खुली और अनौपचारिक थी, जिसमें सभी को अपनी बात रखने और सुनने का अवसर मिला। बेखौफ विकास और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत हुई। दो मुख्य समस्याएँ सामने आईं:निर्देशहीन मलबा फेंकना (Muck Dumping) – निर्माण कार्यों से निकलने वाला मलबा नदियों में डाला जा रहा है, जिससे उनके मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं और बाढ़ व भूस्खलन जैसी आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है।नालियों और जल निकासी का अवरुद्ध होना – शहरों और पहाड़ी क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है, जिससे पानी जमने और संरचनात्मक क्षति की समस्या हो रही है।इसके अलावा, जनसरोकार से जुड़े विभागों और निजी ठेकेदारों की जवाबदेही पर भी सवाल उठे। सभी की राय थी कि इन संस्थाओं की ज़िम्मेदारी तय होनी चाहिए और पर्यावरण सुरक्षा के नियमों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए।चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया कि 21 सितंबर को एक बड़ा जन संवाद आयोजित किया जाएगा, जिसमें थीम आधारित समूह बनाए जाएंगे। ये समूह सेवानिवृत्त पेशेवरों, इंजीनियरों, वन विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और समाजशास्त्रियों को मिलाकर बनाए जाएंगे। ये समूह मिलकर आपदाओं पर एक “जन रिपोर्ट” तैयार करेंगे, जिसमें विभिन्न विषयों को शामिल किया जाएगा। यह रिपोर्ट 1 और 2 नवम्बर को शिमला में होने वाले दो दिवसीय सम्मेलन में प्रस्तुत और चर्चा की जाएगी।यह स्पष्ट किया गया कि यह पूरी प्रक्रिया स्वैच्छिक होगी और जनभागीदारी पर आधारित होगी। इस पहल का उद्देश्य एक ऐसा जन मंच तैयार करना है जो सामूहिक निगरानी, साझी योजना और अब तक अनसुनी रही आवाज़ों को सामने लाने का काम करे।

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