शिमला.देश में वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर चल रही सियासत पर घमासान छिड़ा हुआ है। लोकसभा के बाद राज्यसभा में इस संशोधित विधेयक को रखा गया है। हिमाचल प्रदेश में भी इस संशोधित विधेयक का व्यापक असर देखने को मिलेगा, क्योंकि हिमाचल के 10 जिलों में वक्फ बोर्ड की संपत्तियां हैं। केवल लाहुल-स्पीति या किन्नौर को छोड़ दें, तो अन्य सभी जिलों में बोर्ड की संपत्तियां हैं, जिन पर बड़े पैमाने पर नाजायज कब्जे किए गए हैं। दिलचस्प बात है कि वक्फ बोर्ड ने इन नाजायज कब्जों को छुड़ाने के लिए कार्रवाई सालों पहले से शुरू कर रखी है, मगर इनको छुड़ा नहीं पा रहा, क्योंकि अधिकांश मामले अदालतों में चल रहे हैं। कहीं कब्जाधारी अदालत में गए हैं, तो कहीं वक्फ बोर्ड ने भी अदालत में मामले चला रखे हैं, परंतु अभी तक उनका नतीजा सामने नहीं आया।वक्फ बोर्ड से मिली जानकारी के अनुसार उसके पास पूरे प्रदेश में कुल 752 वक्फ ईस्टेट हैं, जिनके अधीन में 4304 संपत्तियां आती हैं और इस संपत्ति में अधिकांश पर कब्जा है। इन संपत्तियों में बात करें तो इसमें ईदगाह आती हैं, मस्जिदें आती हैं, कब्रिस्तान आते हैं वहीं इनके अलावा लोगों के पास यह संपत्ति है जोकि वक्फ बोर्ड के किराएदार हैं। इन किराएदारों के पास बेशकीमती संपत्तियां हैं। राज्य में 10 जिलों में मस्जिदें भी हैं और कब्रिस्तान भी हैं। यहां दिलचस्प बात यह है कि कई जिलों में राजस्व रिकॉर्ड में वक्फ संपत्तियों का डाटा ही नहीं है और यह आंकड़े वक्फ बोर्ड के पास उपलब्ध है। वक्फ बोर्ड के पास 10 जिलों में 4304 वो संपत्ति है, जिसे केंद्र सरकार ने अपने राजपत्र में दर्ज कर रखा है। यानी केंद्र सरकार के राजपत्र में दर्ज संपत्तियों को यहां राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं किया गया है। राजधानी शिमला की बात करें तो शिमला में 28 वक्फ ईस्टेट के तहत 700 से ज्यादा संपत्तियां वक्फ बोर्ड की बताई जा रही हैं जिसमें यहां पर मस्जिदें भी हैं, कब्रिस्तान भी हैं और ईदगाह भी शामिल है। ईदगाह की बात करें तो यहां पर वक्फ की जमीन पर सैंकड़ों लोग रह रहे हैं। यहां लोगों ने किराए पर वक्फ बोर्ड से जमीन ले रखी है, जिसके लिए पंजाब वक्फ बोर्ड के समय में लीज करवाई गई थी।हिमाचल में पहले पंजाब वक्फ बोर्ड की जमीन थी। पहले यह संपत्तियां उसके अधीन आती थीं, लेकिन बाद में हिमाचल का वक्फ बोर्ड बना, जिसके नाम पर इसे ट्रांसफर किया गया है। पंजाब वक्फ बोर्ड के समय में 99 साल की लीज होती थी ,लेकिन उसे अब वक्फ बोर्ड नहीं मान रहा है और नए केंद्रीय एक्ट के तहत यहां पर भारी भरकम किराया लोगों पर लगाया गया है। बोर्ड की संपत्तियों पर लोगों ने कामर्शियल गतिविधियां चला रखी हैं। यदि शिमला की बात करें तो यहां मालरोड पर आधा बाजार वक्फ की संपत्ति पर बसा हुआ है, जिसके कुछ केस अदालत में चल रहे हैं।वक्फ बोर्ड ने अपनी संपत्तियों को सर्किल के हिसाब से बांट रखा है। कुल 752 वक्फ ईस्टेट के तहत सर्किल वाइज शिमला में 28 ईस्टेट, सोलन, सिरमौर में 92, धर्मशाला सर्किल में धर्मशाला, कांगड़ा, कुल्लू, चंबा व मंडी के तहत 301 ईस्टेट, ऊना सर्किल के तहत ऊना, हमीरपुर व बिलासपुर में 331 ईस्टेट हैं। आगे इनके तहत संपत्तियां आती हैं।हिमाचल प्रदेश में वक्फ संपत्तियों पर पहले पंजाब का ही कानून चलता था, लेकिन पूर्व में कांग्रेस सरकार के समय में ही यहां पर भी केंद्र सरकार का वक्फ एक्ट लागू कर दिया गया। इस एक्ट के लागू होने से किराएदारों से भारी भरकम किराया लिए जाने को नोटिस दिए गए हैं। इन नोटिस के बाद मामले अदालतों में चले गए। अब कई साल से मामले लटके हुए हैं। नए संशोधित कानून के बाद वक्फ संपत्तियों पर चल रहा विवाद और ज्यादा बढ़ जाएगा, जिससे हिमाचल के वे लोग, जिनके पास यह संपत्तियों पर हैं, उन पर गाज गिरनी तय है।













