शिमला।प्रदेश सरकार की बेशकीमती संपत्ति होटल वाइल्ड फ्लॉवर हॉल को कुछ समय के लिए ओबेरॉय गु्रप के पास ही रखने के लिए नए सिरे से सरकार एग्रीमेंट करेगी। शनिवार को होने वाली कैबिनेट की बैठक में उनके साथ होने वाले एग्रीमेंट को रखा जाएगा, जिस पर चर्चा करने के बाद मंत्रिमंडल इसे मंजूरी दे सकता है। मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही ओबेरॉय गुु्रप को तब तक होटल वाइल्ड फ्लॉवर हॉल चलाने की अनुमति होगी, जब तक उसके लिए कोई नया बिडर नहीं मिल जाता। सूत्रों के अनुसार मशोबरा होटल लिमिटेड के निदेशक मंडल की बैठक शुक्रवार को हुई है, जिसमें इस मामले को लेकर चर्चा की गई। बता दें कि पहले निदेशक मंडल में ओबेरॉय गु्रप के सदस्य भी होते थे, लेकिन अब 31 मार्च के बाद वे इस निदेशक मंडल में नहीं रहे हैं, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला था कि 31 मार्च तक वह होटल को सौंप देंगे।ऐसे में शुक्रवार को जो बैठक हुई, वह सरकार द्वारा लगाए गए निदेशकों के बीच हुई। इसमें ओबेरॉय के साथ कुछ समय के लिए होने वाले एग्रीमेंट को लेकर चर्चा हुई। यह ड्राफ्ट कैबिनेट के सामने लाया जाएगा, जिसमें तय किया जाएगा कि कितने समय के लिए इसी गु्रप को होटल चलाने के लिए दिया जाएगा और इसकी शर्तें क्या रहेंगी। अब नए सिरे से शर्तों का निर्धारण किया जाना है।इसके बाद जिस कंपनी को सरकार ने बिडर ढूंढऩे का काम सौंपा है, वह टेंडर आदि का प्रोसेस करेगा और जल्द से जल्द हाई बिडिंग करने वाली कंपनी को ढूंढ़ा जाएगा, ताकि उसके वाइल्ड फ्लॉवर हॉल होटल को चलाने के लिए दिया जाए।अदालत के आदेशों के बाद अभी जब तक ओबेरॉय गु्रप इस होटल को अपने पास रखेगा, तब तक उसे हर महीने 1.78 करोड़ रुपए की राशि सरकार को देनी होगी। इस गु्रप ने 18 प्रतिशत की दर से 125 करोड़ रुपए न्यायालय में जमा करवाया है, लेकिन अभी तक पिछली बकाया राशि तय नहीं हो पाई है, जो भी उसे सरकार को चुकता करनी होगी। बताया जा रहा है कि ओबेरॉय गु्रप यानी ईस्ट इंडिया कंपनी के साथ जो विवाद है, उसको लेकर अभी एक मामले में सुनवाई हाई कोर्ट में होनी है। छह अप्रैल को हाई कोर्ट में इस मामले पर सुनवाई होनी है, लेकिन वह इस विवाद से अलग मामला है। होटल के संचालन को लेकर पहले ही सुप्रीम कोर्ट से निर्णय हिमाचल सरकार के हक में आ गया है।











