शिमला।नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने हिमाचल सरकार को आदेश दिए थी कि पर्यावरण संरक्षण और मुआवजे की राशि का सही तरह से आबंटन करने के लिए उच्च स्तरीय कमेटी बनाई जाए। एनजीटी के निर्देशों पर सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में कमेटी का गठन कर दिया है। इस कमेटी के माध्यम से यहां पर्यावरण संरक्षण को सख्ती से लागू किया जाएगा, वहीं पर्यावरणीय मुआवजे को भी सही तरह से आबंटित किया जा सकेगा। अभी तक इस संबंध में उच्च स्तरीय कमेटी नहीं थी और विभाग अपने स्तर पर काम कर रहे थे, लेकिन इसको लेकर कई तरह के सवाल खड़े हुए और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को इसमें हस्तक्षेप करना पड़ा है। राज्य प्रदूषण बोर्ड को इसमें कड़ाई से अनुपालना करने के निर्देश जारी किए हैं।इन निर्देशों की अनुपालना करते हुए सरकार ने हिमाचल प्रदेश राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पास उपलब्ध पर्यावरण क्षतिपूर्ति निधियों के कुशल और विवेकपूर्ण उपयोग की देखरेख और मार्गदर्शन के लिए एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन किया है। मुख्य सचिव के अलावा इस कमेटी में अतिरिक्त मुख्य सचिव वन, अतिरिक्त मुख्य सचिव जल शक्ति, अतिरिक्त मुख्य सचिव पर्यावरण, सचिव ग्रामीण विकास, सचिव शहरी विकास व सदस्य सचिव प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को सदस्य बनाया गया है। पर्यावरण विभाग के निदेशक इस कमेटी के सदस्य सचिव होंगे। समिति यह सुनिश्चित करेगी कि पर्यावरण संरक्षण और जीर्णोद्धार कार्यों के लिए ईसी फंड का उपयोग एनजीटी और सीपीसीबी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप सख्ती से किया जाए।समिति प्रगति का आकलन करने, प्रस्तावों को मंजूरी देने और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए नियमित अंतराल पर बैठक करेगी। निधियों के उपयोग और अनुमोदित परियोजनाओं के कार्यान्वयन की स्थिति को सार्वजनिक प्रकटीकरण के लिए हर छह महीने में राज्य सरकार के पोर्टल पर अपलोड करने के लिए इस विभाग को प्रस्तुत किया जाएगा।












