April 30, 2026 1:04 am

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान में “दार्शनिक दृष्टि से राधाकृष्णन” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी

शिमला,मार्च। भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), राष्ट्रपति निवास, शिमला में 9–10 मार्च 2026 को “Darśana of Radhakrishnan: Eternal and Temporal (राधाकृष्णन का दर्शन: शाश्वत और लौकिक)” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस संगोष्ठी का उद्देश्य भारत के महान दार्शनिक, शिक्षाविद् तथा पूर्व राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के दर्शन, भारतीय आध्यात्मिक परंपरा की उनकी व्याख्या तथा समकालीन विश्व में उनकी प्रासंगिकता पर गहन विमर्श को प्रोत्साहित करना है।डॉ. राधाकृष्णन को भारतीय दर्शन की वैश्विक पहचान स्थापित करने वाले महान चिंतक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने पूर्व और पश्चिम के विचारों के बीच संवाद स्थापित करते हुए मानवता की आध्यात्मिक एकता, नैतिक मूल्यों तथा सभ्यता के भविष्य के संबंध में महत्वपूर्ण चिंतन प्रस्तुत किया। उनके दर्शन में वेदांत की गहन व्याख्या, मानवतावाद तथा आध्यात्मिक दृष्टि से जीवन की समग्र समझ का समन्वय मिलता है।संगोष्ठी का उद्घाटन सत्र 9 मार्च 2026 को प्रातः 9:30 बजे आयोजित होगा। उद्घाटन सत्र में प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी, निदेशक, भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान द्वारा स्वागत भाषण दिया जाएगा, जबकि मुख्य वक्तव्य केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। इस अवसर पर संस्थान की अध्यक्ष प्रो. शशि प्रभा कुमार भी अपना अध्यक्षीय संबोधन देंगी। कार्यक्रम के दौरान संस्थान द्वारा प्रकाशित कुछ नवीन पुस्तकों का विमोचन भी किया जाएगा।दो दिवसीय इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में देश-विदेश के प्रतिष्ठित विद्वान डॉ. राधाकृष्णन के दर्शन के विभिन्न आयामों पर अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। इनमें इज़राइल के तेल अवीव विश्वविद्यालय से प्रो. डैनियल रवेह, संयुक्त राज्य अमेरिका के शॉनी स्टेट विश्वविद्यालय से प्रो. लावण्या वेंसमनी, दिल्ली विश्वविद्यालय से प्रो. बालगणपति देवरकोंडा, जेएनयू से प्रो. नटराजू ए., मुंबई विश्वविद्यालय से प्रो. नमिता निम्बालकर सहित कई अन्य प्रतिष्ठित विद्वान भाग लेंगे। विभिन्न शैक्षणिक सत्रों में राधाकृष्णन के मानवतावाद, वेदांत और माया सिद्धांत की उनकी व्याख्या, भगवद्गीता पर उनके विचार, तथा समकालीन वैश्विक बौद्धिक विमर्श में उनके योगदान जैसे विषयों पर गहन चर्चा की जाएगी।संगोष्ठी के अवसर पर 9 मार्च 2026 को भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान के सिद्धार्थ विहार अतिथि गृह में स्थापित अत्याधुनिक स्वचालित कॉन्फ्रेंस हॉल का भी उद्घाटन किया जाएगा। यह आधुनिक सुविधाओं से युक्त कॉन्फ्रेंस हॉल संस्थान की शैक्षणिक गतिविधियों, संगोष्ठियों तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर के अकादमिक संवाद को और अधिक सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान द्वारा आयोजित यह संगोष्ठी न केवल डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के बहुआयामी व्यक्तित्व और दर्शन को पुनः समझने का अवसर प्रदान करेगी, बल्कि भारतीय दार्शनिक परंपरा और वैश्विक बौद्धिक संवाद के बीच नए सेतु स्थापित करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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