शिमला,अप्रैल।,SFI हिमाचल प्रदेश में बढ़ रहे अकादमिक भ्रष्टाचार और छात्रों पर बढ़ रहे आर्थिक बोझ का विरोध करती है।* SFI हिमाचल प्रदेश राज्य कमेटी हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा लाए गए फीस बढ़ोतरी के प्रस्ताव का विरोध करती है। SFI का मानना है कि प्रदेश सरकार और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन आर्थिक बोझ का हवाला देकर विश्वविद्यालय और प्रदेश के कॉलेजों में फीस बढ़ाने जा रहे हैं। इस मुद्दे को संबोधित करते हुए राज्य अध्यक्ष अनिल ठाकुर का कहना है कि फीस बढ़ोतरी का प्रस्ताव छात्र हित के लिए नुकसानदायक है। राज्य अध्यक्ष का कहना है कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन विश्वविद्यालय के आर्थिक संसाधनों का दुरुपयोग कर रहा है, जिसके परिणाम छात्रों को भुगतने पड़ रहे हैं। उन्होंने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में लगभग 186 प्रोफेसर बिना किसी योग्यता के भरे गए हैं।ये नियुक्तियां योग्यता को दरकिनार करके की गई थी, जिसके चलते हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय को आर्थिक बोझ उनकी सेवाओं का उठाना पड़ रहा है। इसके साथ साथ राज्य अध्यक्ष का कहना है कि विश्वविद्यालय आज धांधलियों का अखाड़ा बन गया है। जिसके चलते हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय आज आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय में न ही छात्रों के लिए छात्रावास की सुविधा है और न ही बसों की कोई व्यवस्था। प्रदेश विश्वविद्यालय में अपनी बसें न होने के चलते हर महीने अत्यधिक किराया HRTC को देना पड़ रहा है जिसमें कुछ महीनों की लागत से नई बसें विश्वविद्यालय के लिए खरीदी जा सकती हैं। उनका कहना है रिसोर्स मोबलाइजेशन के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन आर्थिक संसाधन जुटाने में असमर्थ है और इसके विपरीत प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन फीस बढ़ाने जा रहे हैं। उनका कहना है एग्जाम रिवॉल्यूशन के नाम पर विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहा है और महंगे रेट पर विश्वविद्यालय में छात्रों के पेपर चेक किए जा रहे हैं। इसके साथ उनका कहना है कि परीक्षा निरीक्षक के तौर पर जिन प्रोफेसर की ड्यूटी परीक्षा में लगाई जा रही उन्हें वेतन के साथ-साथ अलग शुल्क भी विश्वविद्यालय प्रशासन दे रहा है। इसका भार भी छात्रों के ऊपर ही पड़ रहा है। इसके साथ साथ छात्रों को परीक्षा में फेल करके उन्हें पुनरीक्षण में पास किया जा रहा है जिसके चलते कहीं गुना फीस छात्रों से ली जा रही है। जिसे अब 75% बड़ा दिया है। राज्य अध्यक्ष का मानना है कि विश्वविद्यालय ने कंपनी के साथ मिलकर इस काम का गठजोड़ बना लिया है। इन सभी मुद्दों पर राज्य अध्यक्ष का कहना है कि SFI प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन के इन छात्र विरोधी निर्णयों का विरोध करती है और यह चेतावनी विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार को देती है कि अगर इस तरह के छात्र विरोधी निर्णयों को वापिस नहीं लिया गया तो SFI प्रदेश के छात्रों को लामबंद कर पूरे प्रदेश में इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन करेगी। जिसके जिम्मेवार हिमाचल प्रदेश राज्य सरकार और हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन होंगे।











