April 18, 2026 7:48 pm

स्वास्थ्य मंत्री के क्षेत्र में ‘दीये तले अंधेरा’, ICU में स्वास्थ्य व्यवस्था—चायल अस्पताल बना ‘रेफर सेंटर’, मरीज बेहाल : रमा ठाकुर 

शिमला,अप्रैल।भाजपा प्रदेश मीडिया सह प्रभारी रमा ठाकुर ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की हकीकत जाननी हो तो चायल सिविल अस्पताल का हाल देख लेना ही काफी है। सबसे हैरानी की बात यह है कि यह बदहाली किसी दूरदराज क्षेत्र की नहीं, बल्कि खुद स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनी राम शांडिल के विधानसभा क्षेत्र की है। यहां हालात ऐसे हैं मानो सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह भगवान भरोसे छोड़ दिया हो।रमा ठाकुर ने कहा कि करीब 40 से 50 किलोमीटर के दायरे को स्वास्थ्य सुविधाएं देने वाला चायल सिविल अस्पताल आज खुद ही ‘आईसीयू’ में नजर आ रहा है। अस्पताल में न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही जरूरी विशेषज्ञ। पूरा अस्पताल डेपुटेशन के सहारे चलाया जा रहा है, जो यह साफ दर्शाता है कि सरकार के पास न तो कोई ठोस नीति है और न ही क्षेत्र की जनता के प्रति कोई गंभीरता।उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि अस्पताल अब इलाज का केंद्र नहीं, बल्कि ‘रेफर सेंटर’ बनकर रह गया है। यहां आने वाले मरीजों को प्राथमिक उपचार तक सही ढंग से नहीं मिल पा रहा और उन्हें सीधे शिमला, सोलन या निजी अस्पतालों की ओर भेज दिया जाता है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए यह स्थिति बेहद पीड़ादायक है, क्योंकि उन्हें इलाज के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे समय और पैसे दोनों की भारी बर्बादी होती है।उन्होने कहा कि स्थानीय लोगों में इस लापरवाही को लेकर गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि यह सिर्फ प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि क्षेत्र की जनता के साथ खुला अन्याय है। जब स्वास्थ्य मंत्री के अपने क्षेत्र का यह हाल है, तो बाकी प्रदेश की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।क्षेत्रवासियों ने सरकार से स्पष्ट मांग की है कि चायल सिविल अस्पताल को तुरंत प्रभाव से सुचारु रूप से चलाया जाए। विशेष रूप से मेडिसिन, स्त्री रोग विशेषज्ञ और बाल रोग विशेषज्ञ के पदों को हर हाल में जल्द से जल्द भरा जाए, ताकि लोगों को अपने क्षेत्र में ही समुचित इलाज मिल सके। इसके साथ ही अस्पताल में आवश्यक उपकरणों और सुविधाओं को भी तत्काल उपलब्ध कराया जाए।ठाकुर ने सरकार को चेताया यदि जल्द ही इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो सरकार को स्थानीय लोगों के आक्रोश को झेलना पड़ेगा। ऐसे किसी भी आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी। सरकार इस गंभीर स्थिति को समझते हुए समय रहते कार्रवाई करे, नही तो चायल के लोग यूं ही बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था का खामियाजा भुगतते रहेंगे।

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