शिमला,अप्रैल।हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) के ‘स्टूडेंट्स फॉर होलिस्टिक डेवलपमेंट ऑफ ह्यूमैनिटी’ (शोध) फाउंडेशन द्वारा एमबीए विभाग के सम्मेलन कक्ष में “भारतीय शासन कला में राजनीतिक और रणनीतिक विचारों को समझना: चाणक्य से मोदी तक” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया।कार्यक्रम की शुरुआत पारंपरिक दीप प्रज्ज्वलन से हुई, जिसके पश्चात श्री नेक राम ने स्वागत भाषण प्रस्तुत किया। इस अवसर पर एचपीयू के सीडीओई में एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. जोगिंदर सकलानी ने मुख्य वक्ता के रूप में भारत की रणनीतिक संस्कृति की निरंतरता पर विस्तृत और ज्ञानवर्धक संबोधन दिया।अपने व्याख्यान में डॉ. सकलानी ने प्राचीन वैश्विक रणनीतियों, विशेषकर सन त्ज़ु की ‘द आर्ट ऑफ वॉर’, और चाणक्य की व्यावहारिक ‘रियलपोलिटिक’ के बीच समानताओं को रेखांकित किया। उन्होंने मंडल सिद्धांत और सप्तांग सिद्धांत जैसे शास्त्रीय ढांचों का विस्तार से वर्णन करते हुए उनके आधुनिक संदर्भों को समझाया।इतिहास और समकालीन भू-राजनीति के बीच सशक्त संबंध स्थापित करते हुए उन्होंने बताया कि किस प्रकार यह प्राचीन ज्ञान आज की भारतीय विदेश नीति को प्रभावित कर रहा है। विशेष रूप से इज़राइल-ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के संदर्भ में भारत के संतुलित और स्वतंत्र कूटनीतिक दृष्टिकोण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने ऊर्जा हितों और रणनीतिक स्वायत्तता को बनाए रखते हुए वैश्विक मंच पर सक्रिय भूमिका निभा रहा है।डॉ. सकलानी ने ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ जैसी पहलों का उल्लेख करते हुए भारत की दूरदर्शी और सधी हुई कूटनीति को भी उजागर किया।कार्यक्रम का समापन निकिता द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद प्रस्ताव के साथ हुआ। यह व्याख्यान छात्रों और शिक्षकों के लिए अत्यंत ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक साबित हुआ।











