शिमला। प्रदेश राज्य बिजली बोर्ड 15 जून के बाद पड़ोसी राज्य पंजाब को बैंकिंग प्रणाली से ली गई बिजली वापस लौटाना शुरू कर देगा। सर्दियों के दिनों में हिमाचल प्रदेश ने पंजाब राज्य से हर साल की तरह इस बार भी बैंकिंग व्यवस्था के तहत बिजली ली थी ऐसे में अब गर्मियों के सीजन में इस बिजली को वापस लौटाया जाता है। इस साल 15 जून से बैंकिंग प्रणाली के तहत बिजली वापसी की शुरुआत की जाएगी और अगस्त महीने तक पंजाब से ली गई बिजली को पूरी तरह से वापस करने के साथ अतिरिक्त बिजली भी उसे दी जाएगी। यह अतिरिक्त बिजली आगामी सर्दियों के दिनों में फिर कॉन्ट्रा बैंकिंग प्रणाली के तहत वापस ली जाती है। प्रदेश की बिजली परियोजनाओं में उत्पादन तेजी के साथ बढऩे लगा है।नदियों में पानी पर्याप्त है और बिजली परियोजनाओं के लिए उत्पादन में फिलहाल अभी किसी तरह की कमी नहीं रही है। लगातार ऊर्जा उत्पादन में बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो अगले कुछ दिनों में और अधिक बढ़ जाएगी। उम्मीद की जा रही है कि 15 जून तक जिस तरह का मौसम अब प्रदेश में रहने वाला है उससे सभी बिजली परियोजनाएं 100 फीसदी उत्पादन करना शुरू कर देंगी। प्रदेश को वर्तमान में रोजाना 270 लाख यूनिट बिजली की जरूरत रहती है। हिमाचल के पास वर्तमान में रोजाना 390 लाख यूनिट से ज्यादा बिजली उपलब्ध हो रही है। यही वजह है कि पंजाब और छत्तीसगढ़ को बिजली बेची भी जा रही है कुछ दिन पहले तक इन दोनों राज्यों को 30-30 लाख यूनिट बिजली बेची जा रही थी जिसे अब बढ़ाकर 100 लाख यूनिट कर दिया है।बता दें कि राज्य सरकार के हिस्से की जो बिजली मिलती है उसमें भी सरकार को इस बार मुनाफा हुआ है पिछले वित्त वर्ष में सरकार ने करीब 1700 करोड़ रुपए से ज्यादा की बिजली अपने हिस्से की बची है, जो कि पिछले सालों से कहीं ज्यादा है। आगामी वित्त वर्ष के लिए भी नई रणनीति अपनाई गई है और इसमें भी ज्यादा बिजली बेचने का लक्ष्य रखा गया है। फिलहाल हिमाचल प्रदेश को बिजली उत्पादन में राहत मिलना शुरू हो चुकी है ।











