April 15, 2026 2:37 am

बिजली परियोजनाओं के बदले हिमाचल से 3290 करोड़ रुपए मांगे

शिमला | केंद्रीय उपक्रमों से बिजली परियोजनाएं वापस लेने के हिमाचल मंत्रिमंडल के फैसले पर केंद्र सरकार के अड़ंगे शुरू हो गए हैं। केंद्र सरकार ने इन परियोजनाओं के बदले हिमाचल से 3290 करोड़ रुपए मांगे हैं भारत सरकार के ऊर्जा सचिव पंकज अग्रवाल की तरफ से प्रदेश के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को पत्र आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि राज्य सरकार को इन प्रोजेक्टों को टेक ओवर करना है, तो वह तुरंत पैसे का भुगतान करे। इसमें एसजेवीएनएल के तीन प्रोजेक्ट और एनएचपीसी का एक प्रोजेक्ट है, जिसके लिए केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने 3290 करोड़ की राशि ब्याज के अतिरिक्त मांगी है।बता दें कि हिमाचल मंत्रिमंडल ने निर्णय लिया था कि अलग से मूल्यांकन किया जाएगा कि कितना पैसा इन परियोजना उत्पादकों ने खर्च किया है, लेकिन इससे पहले ही भारत सरकार से पत्र आ गया है कि 3290 करोड़ रुपए इन परियोजनाओं पर जनवरी 2025 तक खर्च किए गए हैं। इसके अलावा जो ब्याज की राशि लगती है, वह भी सरकार को चुकता करनी होगी। यानी ब्याज सहित यह पैसा प्रदेश सरकार चुकता कर दे और इन चारों प्रोजेक्टों को टेक ओवर कर ले। यह मामला आने वाले समय में अब बड़े विवाद का कारण बनेगा। हालांकि राज्य सरकार भी इसमें पीछे हटने वाली नहीं है, क्योंकि सरकार को भी पहले से पता है कि यदि उसे प्रोजेक्ट चाहिए, तो पैसा चुकता करना ही होगा।वैसे बता दें कि हिमाचल प्रदेश में इन चार बड़े प्रोजेक्टों को सरकार अपने हाथ में लेती है, तो आने वाले समय में हिमाचल समृद्ध होने की तरफ बड़े कदम बढ़ाएगा। क्योंकि इन परियोजनाओं से बड़ा फायदा सरकार को भविष्य में हो सकता है। सरकार का आर्थिक संकट पूरी तरह से दूर हो जाएगा। भारत सरकार की ओर से मुख्य सचिव को जो पत्र आया है, उसमें साफ किया गया है कि एनएचपीसी का डूगर प्रोजेक्ट, जोकि 500 मेगावाट का है, उस पर लगभग 114 करोड़ रुपए का खर्चा हो चुका है। सतलुज जल विद्युत निगम लिमिटेड के पास तीन परियोजनाएं हैं, जिनका आईए यानी इंप्लीमेंटेशन एग्रीमेंट नहीं किया गया था।इन परियोजनाओं में सुन्नी डैम परियोजना, लूहरी चरण एक परियोजना व धौलासिद्ध परियोजनाएं हैं। इससे पहले यहां प्रदेश सरकार कह चुकी है, जितनी दावेदारी इन परियोजनाओं पर खर्च हुए पैसे की हो रही है, वह सही नहीं है। इन परियोजनाओं को उनसे वापस लेने के लिए यहां कैबिनेट ने फैसला तो ले लिया है, मगर यह इतना ज्यादा आसान नहीं होगा। सरकार को भारी भरकम खर्चा करना होगा और उनको पैसा चुकता करना होगा। देखना होगा कि इस पर अब आगे क्या होता है। इससे यहां सरकार के अधिकारियों में हडक़ंप है और सीएम के वापस लौटने के बाद वे उनसे विस्तृत चर्चा कर आगे निर्णय लेंगे।

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