April 29, 2026 4:57 pm

हिम केयर कार्ड नहीं चलने पर गिरवी रखकर मां कराया इलाज।

चंबा। हिमाचल प्रदेश में हिमकेयर कार्ड धारकों को दवाएं और इलाज के अन्य सामान मुफ्त नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में गरीब मरीज परेशान हैं। गुरुवार को चंबा मेडिकल कॉलेज में एक ट्रेनी डॉक्टर ने ऑपरेशन टेबल पर लेटी महिला के बेटे को 15 हजार रुपए के सामान की लिस्ट थमा दी। बेटे ने दोस्तों-रिश्तेदारों से कर्ज लेकर और मां की बालियां गिरवी रखकर सामान खरीदे, तब जाकर ऑपरेशन हो पाया।अब अस्पताल प्रबंधन मामले की जांच की बात कर रहा है। लेकिन यह अकेले चंबा का हाल ही नहीं है। राज्य के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में हिमकेयर कार्ड धारकों को बाजार से दवाएं खरीदनी पड़ रही है। इसकी वजह है हिमकेयर में रजिस्टर्ड सरकारी अस्पतालों की सुक्खू सरकार पर बढ़ती देनदारी।मेडिकल कॉलेज में 67 साल की लांबो देवी पित्ताशय की पथरी के इलाज के लिए भर्ती हुई थीं। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें ऑपरेशन की सलाह दी थी। हिमकेयर कार्ड होने के कारण जांच और अस्पताल में भर्ती होने की प्रक्रिया तो कैशलेस हुई, लेकिन जब ऑपरेशन की बारी आई तो लांबो देवी को एप्रन में ऑपरेशन टेबल पर लिटा दिया गया। ऑपरेशन रूम में ही ट्रेनी डॉक्टर ने लांबो देवी के बेटे कुलदीप कुमार को 15 हजार रुपए की दवाओं की लिस्ट सौंप दी।कुलदीप लिस्ट लेकर जब मेडिकल स्टोर पहुंचा तो दवाओं की कीमत जानकर उसके होश उड़ गए। उसने हिमकेयर कार्ड का हवाला दिया, लेकिन केमिस्ट ने इनकार कर दिया। मजबूरन कुलदीप से अपने दोस्तों-रिश्तेदारों को फोन लगाकर मदद मांगी तो 6500 ही इकट्ठा हो पाए। कुलदीप ने आखिर में मां की सोने की बालियां केमिस्ट को यह कहकर गिरवी रख दीं कि शाम तक और पैसों का इंतजाम होने पर वह बालियां छुड़वा लेगा।मां के ऑपरेशन के लिए डॉक्टर को सामान सौंपकर कुलदीप दोबारा पैसों के इंतजाम में जुट गया। उसने किसी तरह बाकी के 8500 रुपए जुगाड़े और तब जाकर मां की बालियां छुड़ा पाया। मेडिकल कॉलेज चंबा के मीडिया समन्वयक डॉ. मानिक सहगल ने मामले की जांच करने की बात कही है।

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