April 15, 2026 8:14 am

*समग्र शिक्षा की बड़ी पहल: हेल्थकेयर वोकेशनल सेक्टर के स्कूली बच्चों को पीजीआई चंडीगढ़ में इंटर्नशिप एवं ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग।

*शिमला।समग्र शिक्षा ने व्यावसायिक शिक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक पहल की है। इसके तहत व्यावसायिक शिक्षा ग्रहण कर रहे स्कूली विद्यार्थियों को प्रदेश से बाहर प्रतिष्ठित संस्थानों में व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने की शुरुआत की गई है। इसी कड़ी में प्रदेश के स्कूलों में हेल्थकेयर वोकेशनल कोर्स कर रहे जमा दो कक्षा के मेधावी विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च (पीजीआई), चंडीगढ़ में इंटर्नशिप एवं ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग प्रदान की जा रही है। यह पहली बार है जब हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में हेल्थ केयर में वोकेशनल शिक्षा ग्रहण करने वाले विद्यार्थियों को पीजीआई से प्रशिक्षण का अवसर मिला है।पहले चरण में प्रदेश के सिरमौर, बिलासपुर और सोलन जिलों के जमा दो कक्षा के कुल 210 मेधावी विद्यार्थियों को पीजीआई में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग दी जा रही है। इनमें सिरमौर जिले से 67, बिलासपुर से 72 और सोलन जिले से 71 विद्यार्थी शामिल हैं। इस प्रकार कुल 210 विद्यार्थी वर्तमान में पीजीआई में हैंड-ऑन प्रैक्टिस कर रहे हैं। शनिवार को सभी विद्यार्थियों को विभिन्न समूहों में विभाजित कर अलग-अलग विभागों में व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

*पीजीआई की स्वास्थ्य सेवाओं से कराया गया परिचय*

प्रशिक्षण के दौरान स्कूली विद्यार्थियों को पीजीआई की स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यप्रणाली से विस्तार से अवगत कराया गया। उन्हें पर्ची बनाने की प्रक्रिया, ओपीडी सेवाओं, मरीजों की देखभाल, स्टाफ नर्स की ड्यूटी, जनरल ड्यूटी तथा अस्पताल के कार्य संचालन की जानकारी दी गई। इस दौरान विद्यार्थियों को हेल्थ सेवाओं की वास्तविक कार्यप्रणाली को नजदीक से देखने और समझने का अवसर मिला, जिससे उन्हें हैंड-ऑन प्रैक्टिस का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ।

*समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने जाना बच्चों का अनुभव* 

इस अवसर पर समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा विशेष रूप से मौजूद रहे। उन्होंने पीजीआई में ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों से संवाद किया और उनके अनुभवों को जाना। उन्होंने विद्यार्थियों को इस प्रकार की व्यावहारिक ट्रेनिंग से अधिक से अधिक सीखने और भविष्य में इसे अपने करियर निर्माण में उपयोग करने के लिए प्रेरित किया।इस दौरान पीजीआई के डिप्टी डायरेक्टर पंकज राय और डॉ. राजीव चौहान भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। पंकज राय ने विद्यार्थियों को मेहनत और लगन से पढ़ाई करने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि अनुशासन और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों को सुबह जल्दी उठने और मोबाइल फोन के सीमित उपयोग की सलाह भी दी।

*773 स्कूली बच्चों को मिलेगा प्रशिक्षण का अवसर*

समग्र शिक्षा के अंतर्गत हेल्थकेयर सेक्टर के जमा दो कक्षा के कुल 773 मेधावी विद्यार्थियों को 6 से 14 फरवरी तक चरणबद्ध तरीके से पीजीआई में इंटर्नशिप एवं ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग प्रदान की जाएगी। पहले चरण में 210 विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जबकि दूसरे चरण में 8 से 10 फरवरी तक चंबा और कांगड़ा जिलों के 205 विद्यार्थियों को, इसके बाद 10 से 12 फरवरी तक शिमला, ऊना और कुल्लू जिलों के 180 विद्यार्थियों को तथा 12 से 14 फरवरी तक मंडी और हमीरपुर जिलों के 176 स्कूली विद्यार्थियों को हैंड-ऑन प्रैक्टिस कराई जाएगी।

*रोजगारोन्मुख शिक्षा की दिशा में समग्र शिक्षा का प्रभावी प्रयास*

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में विद्यार्थियों को रोजगारोन्मुख शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से विभिन्न वोकेशनल पाठ्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। इनमें ऑटोमोटिव, हेल्थकेयर, टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी, टेलीकॉम, सिक्योरिटी, एग्रीकल्चर, आईटी-आईटीईएस, बीएफएसआई, रिटेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड हार्डवेयर, प्लंबर, शारीरिक शिक्षा, ब्यूटी एंड वेलनेस तथा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट जैसे पाठ्यक्रम शामिल हैं। इन पाठ्यक्रमों के साथ-साथ विद्यार्थियों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है। हाल ही में टूरिज्म और आईटी-आईटीईएस सेक्टर के 457 विद्यार्थियों को चंडीगढ़ और मोहाली के प्रतिष्ठित औद्योगिक संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है।समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने कहा कि पीजीआई जैसे प्रतिष्ठित मेडिकल संस्थान में स्कूली विद्यार्थियों को ऑन-द-जॉब ट्रेनिंग प्रदान किया जाना प्रदेश के लिए गर्व का विषय है। इस तरह की व्यावहारिक शिक्षा से विद्यार्थियों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें भविष्य के लिए बेहतर करियर विकल्प चुनने में सहायता मिलती है। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यवहारिक कौशल से जोड़ना है, ताकि वे आत्मनिर्भर बन सकें और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त कर सकें। आने वाले समय में इस प्रकार की पहलों को और अधिक विस्तार दिया जाएगा।

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