April 18, 2026 1:31 am

हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की घोटाले में संलिप्तता के मद्देनजर प्रदेश सरकार से उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की।

शिमला,अप्रैल।भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की राज्य कमेटी ने चेस्टर हिल सोलन घोटाले व हिमाचल प्रदेश में अन्य भूमि घोटालों पर शिमला के कॉम्बरमेयर होटल में प्रेस वार्ता का आयोजन किया। पार्टी ने 275 बीघा भूमि के सैंकड़ों करोड़ रुपए के चेस्टर हिल घोटाले व पंजाब के मोहाली में कई एकड़ भूमि के घोटाले में शामिल हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव की घोटाले में संलिप्तता के मद्देनजर प्रदेश सरकार से उन्हें तत्काल पद से हटाने की मांग की है। पार्टी ने हैरानी व्यक्त की है कि इस घोटाले में मुख्य सचिव की स्पष्ट भ्रष्टाचारी भूमिका के बावजमजूद अभी तक उन्हें पद से नहीं हटाया है। यह सरकार की भूमिका पर कई प्रश्न खड़ा कर रहा है। पार्टी ने इस मामले की तह में जाने के लिए न्यायिक जांच की मांग की है। अगर इस मसले की गम्भीरता से जांच की जाए तो सोलन स्थित चेस्टर हिल घोटाले में कई बड़ी मछलियां बेनकाब होंगी। पार्टी ने चेताया है कि अगर इस घोटाले में दूध का दूध व पानी का पानी न किया गया एवं दोषियों को सलाखों के पीछे न धकेला गया तो पार्टी प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू करेगी। पार्टी ने चैतावनी दी है कि दोषियों पर कार्रवाई न होने की स्थिति में पार्टी प्रदेश सरकार सचिवालय छोटा शिमला का घेराव करेगी। प्रेस वार्ता में पार्टी राज्य सचिव कॉमरेड संजय चौहान, पार्टी राज्य सचिव मंडल सदस्य डॉ कुलदीप सिंह तंवर व विजेंद्र मेहरा मौजूद रहे। प्रेस वार्ता में कॉमरेड संजय चौहान व कुलदीप तंवर ने प्रदेश सरकार पर भ्रष्टाचार को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने हैरानी व्यक्त की है कि करोड़ों रुपए के घोटाले को प्रदेश के मुख्यमंत्री अधिकारियों की आपसी खींचतान कहकर पूरे मामले की गंभीरता को कम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि चेस्टर हिल घोटाले में प्रदेश सरकार की अफसरशाही के सबसे बड़े अधिकारी मुख्य सचिव स्वयं संलिप्त हैं। इन अधिकारी पर राजस्व सचिव रहते हुए भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे तथा वह गिरफ्तार तक हो चुके हैं। मुख्य सचिव की संपत्ति में पिछले कुछ सालों में बेतहाशा वृद्धि हुई है। उन्होंने हिमाचल प्रदेश ब पंजाब में जो भी संपत्तियां खरीदी हैं, करोड़ों रुपयों की ये संपत्तियां कौड़ियों के भाव खरीदी गई हैं। इसमें भारी भ्रष्टाचार है। चेस्टर हिल घोटाले में नगर निगम सोलन आयुक्त एवं एसडीएम व तहसीलदार की दो जांचों को दरकिनार करके मुख्य सचिव द्वारा क्लीन चिट देने से स्पष्ट हो गया है कि पूरी दाल ही काली है। इस मसले पर जिलाधीश की निष्क्रिय कार्यप्रणाली भी कई सवाल खड़ा करती रही है। मुख्य सचिव द्वारा जिलाधीश व जिला के न्यायिक अधिकारी की भूमिका को अपने पास केंद्रित करने से स्पष्ट है कि वे स्वयं पूरे घोटाले के सूत्रधार हैं। उनका स्वयं अग्रिम पंक्तियों में रहकर घोटाले को क्लीन चिट देना पूरी तरह से नगर निगम अधिनियम 1994 व भू राजस्व अधिनियम 1972 का उल्लंघन है। उनके इन कृत्यों द्वारा धारा 118 को कमजोर किया जा रहा है व धरा 118 की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। प्रदेश में भू माफिया सक्रिय है। इसका नौकरशाही, ठेकेदारों, रियल एस्टेट व राजनीतिज्ञों से गठजोड़ है। इस गठजोड़ के कारण प्रदेश में बेनामी सौदे भी हो रहे हैं। गरीब किसानों की जमीनों को कौड़ियों के भाव हड़पा जा रहा है। धारा 118 को पूर्व की भाजपा व वर्तमान कांग्रेस सरकार ने लगातार कमजोर किया है ताकि भू माफिया व रियल एस्टेट के जरिए भारी कमीशनखोरी व जमीनें हड़पने का कार्य किया जा सके। धारा 118 को कमजोर करके व इसे हाशिए पर धकेल कर प्रदेश व किसानों के हितों से खिलवाड़ किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की खामोशी कई प्रश्न खड़ा कर रही है। जनता में यह संदेश जा रहा है कि इस माफिया राज को सरकार का आशीर्वाद प्राप्त है। पार्टी ने चेताया है कि अगर इन घोटालों पर लगाम न लगी तो सीपीआईएम जनता को लामबंद करके सड़कों पर उतरेगी।

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