शिमला। हिमाचल सरकार ने एसजेवीएनएल के अलावा एनएचपीसी से भी दो परियोजनाएं वापस लेने का फैसला लिया है। इसमें से एक बैरास्यूल प्रोजेक्ट 40 साल की मियाद पूरी कर चुका है, जबकि दूसरा चिनाब बेसिन पर डूगर प्रोजेक्ट है। चंबा जिला स्थित डूगर परियोजना 500 मेगावाट क्षमता की है और कठिन भौगोलिक क्षेत्र में इसका निर्माण होना है। बताया जाता है कि एनएचपीसी ने इस परियोजना पर 115 करोड़ रुपए का खर्चा अभी तक कर दिया है। हालांकि यह कंपनी के अपने आंकड़े हैं, जिनका भी सरकार मूल्याकंन करवाएगी। सरकार ने जो फैसला लिया है, उसके अनुसार इस प्रोजेक्ट का भी अलग से मूल्यांकन किया जाएगा, जिसमें पता चलेगा कि आखिर कितना पैसा इस कंपनी द्वारा अब तक लगाया गया है। जिस तरह से सरकार ने कहा है कि वह मूल्यांकन करवाकर थर्ड पार्टी से यह पता करवाएगी कि कंपनी का कितना पैसा लगा है और कंपनी को फिर सरकार यह पैसा देकर उससे प्रोजेक्ट वापस लिया जाना है। अभी तक इस तरह का प्रस्ताव है, जिसपर आने वाले समय में फैसला लिया जाएगा।चंबा की दूरदराज की वैली में प्रस्तावित डूगर बिजली परियोजना को पहले राज्य सरकार ने टाटा कंपनी को दिया था। इस कंपनी ने अपने हिसाब से सर्वे आदि का काम किया, लेकिन बाद में इस कंपनी ने हाथ खड़े कर दिए। कई साल से यह परियोजना प्रस्तावित है, लेकिन अब तक इसका निर्माण नहीं हो पाया। पूर्व की भाजपा सरकार ने टाटा कंपनी से इसे वापस लेकर एनएचपीसी को दे दिया था, जोकि सरकारी उपक्रम है। पूर्व सरकार ने केंद्रीय सरकारी उपक्रम को इस प्रोजेक्ट के निर्माण के लिए सही पाया, लेकिन इनके साथ इंप्लीमेंटेशन एग्रीमेंट (आईए) नहीं किया गया। बिना आईए के इस कंपनी के साथ किए गए करार को अब वर्तमान सरकार ने आधार बनाया है और इससे प्रोजेक्ट वापस लेने की ठानी है। अब देखना होगा कि आगे क्या रहेगा, लेकिन इससे पहले एनएचपीसी का दावा है कि उसके अब तक 115 करोड़ रुपए डूगर प्रोजेक्ट पर खर्च हो चुके हैं। एनएचपीसी का दावा है कि उसने लाडा के तहत प्रभावित एरिया के लोगों को एक किस्त जारी की है, वहीं सर्वेक्षण व इन्वेस्टीगेशन का काम नए सिरे से किया गया है। साथ ही डीपीआर बनाने के लिए भी पैसा खर्च हुआ है। ऐसे में अब देखना होगा कि क्या सरकार इन्हें इतना पैसा देकर प्रोजेक्ट टेक ओवर करती है या फिर अभी इसमें समय लगेगा।













