सोलन। प्रदेश के फार्मा हब के नाम से प्रसिद्ध सोलन जिले की सरकार फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री जो बीते दो दशकों में एशिया के सबसे बड़े औद्योगिक हब में शुमार हुई है, इन दिनों दोहरी चुनौती से गुजर रही है। एक तरफ राज्य में दवाओं की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विभिन्न राज्यों में हिमाचल के नाम पर नकली दवाएं बेचे जाने के मामले सामने आ रहे हैं। हालात को देखते हुए राज्य दवा नियामक ने अब इस पूरे घटनाक्रम को राज्य की साख पर सुनियोजित प्रहार करार दिया है। गत एक साल में उत्तर प्रदेश, गुजरात, कर्नाटक और पंजाब जैसे राज्यों में ऐसे 20 से अधिक मामले सामने आए, जहां भारी मात्रा में नकली दवाएं जब्त की गईं। इन पर बतौर निर्माता हिमाचल प्रदेश की दवा कंपनियों के नाम दर्ज थे, लेकिन पड़ताल में यह बात सामने आई कि जिन इकाइयों का नाम लेबल पर छपा था, वे राज्य में कभी अस्तित्व में ही नहीं थीं।इस घटनाक्रम ने न केवल हिमाचल की फार्मा कंपनियों की साख को झटका दिया, बल्कि उपभोक्ता सुरक्षा और नियामक सतर्कता की नई चुनौतियां भी सामने रख दी हैं। राज्य औषधि नियंत्रक डा. मनीष कपूर के अनुसार इन नकली कंपनियों के नाम और पते हिमाचल के वास्तविक फार्मा क्षेत्र से मेल नहीं खाते। इससे यह स्पष्ट है कि ये दवाएं न केवल अवैध थीं, बल्कि प्रदेश की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने के उद्देश्य से बनाई गई थीं। राज्य दवा नियंत्रक कार्यालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर उस कंपनी पर कानूनी कार्रवाई की जा रही है, जिसके सैंपल देश के किसी भी राज्य में जांच में फेल पाए जाते हैं। ऐसे मामलों में संबंधित राज्य के नियामक विभाग से समन्वय कर कोर्ट में मुकदमे भी दायर किए जाते हैं। वहीं सोलन जिले के कंडाघाट में पहले से कार्यरत कंपोजिट ड्रग टेस्टिंग लैब पहले ही राज्य की दवा जांच प्रक्रिया का आधार रही है। अब एक और अत्याधुनिक परीक्षण प्रयोगशाला को भी सरकार ने हाल ही में क्रियाशील किया है, जिसमें हाई एंड उपकरणों की सहायता से ज्यादा तीव्रता और सटीकता के साथ दवाओं की जांच की जा सकती है। इससे न केवल दोषी कंपनियों की पहचान तेजी से हो सकेगी, बल्कि आमजन को समय पर चेतावनी दी जा सकेगी।













