August 1, 2026 8:43 am

सेना से परामर्श किए बिना ही की युद्ध विराम की घोषणा: मुख्यमंत्री

शिमला।मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शिमला में आयोजित ‘जय हिंद सभा’ में सन् 1962, 1965, 1971, कारगिल तथा ऑपरेशन सिंदूर के प्रतिभागी हिमाचल प्रदेश के वीर सैनिकों को सम्मानित किया तथा शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने शहीदों के परिजनों को सम्मानित करते हुए जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज उन वीर सैनिकों के बलिदान को नमन करने का दिन है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। मुख्यमंत्री ने हाल ही में तीर्थन घाटी के शरची गांव की अपनी यात्रा का उल्लेख करते हुए कहा कि इस दौरान वह पूर्व सैनिक सूबेदार मेजर अनूप राम के घर ठहरे। मेजर अनूपराम ने सन् 1971 के भारत-पाक युद्ध के बारे में अपनी यादें साझा करते हुए बताया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने साहसिक एवं दूरदर्शी नेतृत्व से युद्ध के दौरान भारतीय सेना में अद्भुत बहादुरी, जोश और ऊर्जा का संचार किया था। उसी के परिणामस्वरूप युद्ध का ऐतिहासिक परिणाम हमारे सामने आया और भारत ने पाकिस्तान को दो भागों में विभाजित करते हुए शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए मजबूर कर दिया था। श्री सुक्खू ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के सैनिकों का पराक्रम अतुलनीय है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने कभी देश के लिए अपने प्राणों की आहुति देने में संकोच नहीं किया। हिमाचल प्रदेश ने चार परमवीर चक्र विजेता दिए हैं, जो राज्य की वीरता और बलिदान की समृद्ध परम्पराओं को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद कांग्रेस नेता राहुल गांधी आतंकवाद के खिलाफ केंद्र सरकार को बिना शर्त समर्थन देने के लिए सबसे पहले आगे आए। हिमाचल प्रदेश के लोग और सरकार हमेशा भारतीय सशस्त्र बलों के साथ खड़े हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे वीर सैनिकों ने आतंकवादियों को कड़ा सबक सिखाया हालांकि, केंद्र सरकार ने तीनों सशस्त्र बलों को विश्वास में लिए बिना युद्ध विराम की घोषणा कर दी। यह घोषणा किसी तीसरे देश से सोशल मीडिया के माध्यम से सामने आई। यह घोषणा तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के निर्णायक नेतृत्व के विपरीत है, जिन्होंने कभी भी राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं होने दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने सदैव देश के लिए सर्वाेच्च बलिदान दिया है। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और राजीव गांधी ने देश की एकता और अखंडता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। पंजाब और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में भी कांग्रेस नेताओं ने देश के लिए बलिदान दिया है।

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