शिमला,SFI ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में Ph.D. प्रवेश और कार्यक्रम नीतियों के संबंध में 2025 के विनियमों में कई गंभीर चिंताओं को उठाया है। ये मुद्दे छात्रों पर, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाले पृष्ठभूमि के छात्रों पर, अनुपातहीन बोझ डालते हैं और पारदर्शिता, निष्पक्षता और शैक्षणिक अखंडता को कमजोर करते हैं। नीचे चिंताओं का पुन: संरचित और व्यवस्थित संस्करण दिया गया है, साथ ही SFI की सुधार की मांगें, स्पष्ट और औपचारिक तरीके से प्रस्तुत की गई हैं।
SFI की HPU Ph.D. विनियम 2025 के संबंध में चिंताएँ और मांगें
1. अत्यधिक शुल्क वृद्धि और छात्रों पर वित्तीय बोझ
Ph.D. पंजीकरण शुल्क ₹5000 से बढ़कर ₹8000 हो गया है, जो 60% की वृद्धि दर्शाता है। वार्षिक विकास शुल्क ₹500 से बढ़कर ₹700 हो गया है, जो 40% की वृद्धि है, और मासिक शुल्क ₹800 से बढ़कर ₹1000 हो गया है, जो 25% की वृद्धि को दर्शाता है। ये भारी शुल्क वृद्धियाँ छात्रों, विशेष रूप से मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों, पर एक महत्वपूर्ण वित्तीय बोझ डालती हैं, जिससे उच्च शिक्षा कम सुलभ हो जाती है और ड्रॉपआउट का जोखिम बढ़ जाता है।
मांग: SFI विश्वविद्यालय से इन शुल्क वृद्धियों को वापस लेने और पिछले शुल्क ढांचे (पंजीकरण के लिए ₹5000, विकास के लिए ₹500, और मासिक शुल्क के लिए ₹800) पर लौटने का आग्रह करती है। वैकल्पिक रूप से, विश्वविद्यालय को आर्थिक रूप से वंचित छात्रों के लिए शुल्क माफी, सब्सिडी, या किश्त भुगतान विकल्प शुरू करने चाहिए ताकि वहनीयता सुनिश्चित हो।
2. OBC और EWS के लिए आरक्षण रोस्टर में स्पष्टता की कमी
OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) उम्मीदवारों के लिए आरक्षण नीति अस्पष्ट बनी हुई है। हालांकि OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) उम्मीदवारों को आयु में छूट दी गई है, विश्वविद्यालय ने अपनी स्वयं की आरक्षण नीति शुरू की है जिसमें OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) और EWS दोनों श्रेणियाँ शामिल हैं। हालांकि, नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र को सत्यापित करने या एकत्र करने की कोई परिभाषित प्रक्रिया नहीं है, जिसके कारण संभावित असंगतियाँ और पात्र उम्मीदवारों का बहिष्कार हो सकता है।
मांग: SFI मांग करती है कि विश्वविद्यालय OBC (नॉन-क्रीमी लेयर) और EWS उम्मीदवारों के लिए आरक्षण रोस्टर को स्पष्ट रूप से परिभाषित और सार्वजनिक करे। इसके अतिरिक्त, नॉन-क्रीमी लेयर प्रमाणपत्र एकत्र करने और सत्यापित करने के लिए एक मानकीकृत प्रक्रिया स्थापित की जानी चाहिए, जो पारदर्शिता और राज्य एवं UGC दिशानिर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करे।
3. सुपरवाइज़रों द्वारा रिक्त Ph.D. सीटों का खुलासा न करना
सुपरवाइज़रों को उनकी देखरेख में रिक्त Ph.D. सीटों की संख्या का खुलासा करने की आवश्यकता वाला कोई तंत्र नहीं है। कई विश्वविद्यालय शिक्षक उपलब्ध सीटों को छुपाते हैं, और इस पारदर्शिता की कमी को सार्वजनिक रूप से संबोधित नहीं किया जाता है। इसके अलावा, डीन ऑफ स्टूडेंट्स का कार्यालय सीट उपलब्धता का केंद्रीकृत और सटीक रिकॉर्ड रखने में विफल रहा है, जिससे संभावित छात्रों के लिए निष्पक्ष पहुँच बाधित होती है।मांग: SFI एक अनिवार्य नीति की मांग करती है जिसके तहत सुपरवाइज़रों को उनकी देखरेख में रिक्त Ph.D. सीटों की संख्या को सार्वजनिक रूप से खुलासा करना होगा। विश्वविद्यालय को इस जानकारी को डीन ऑफ स्टूडेंट्स के कार्यालय के माध्यम से केंद्रीकृत करना चाहिए और इसे विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराना चाहिए ताकि पारदर्शिता और सभी उम्मीदवारों के लिए समान अवसर सुनिश्चित हो।
4. शोध प्रस्ताव के अंकों के कारण भेदभावपूर्ण प्रवेश प्रक्रिया
Ph.D. प्रवेश प्रक्रिया में शोध प्रस्ताव, इसकी प्रस्तुति और बचाव के लिए अंक आवंटित किए जाते हैं (प्रत्येक 5 अंक, खंड 5(2)(ii) के अनुसार)। यह व्यक्तिपरक मूल्यांकन विधि योग्य उम्मीदवारों को बाहर करने का जोखिम पैदा करती है और भाई-भतीजावाद और भेदभाव को बढ़ावा देती है, क्योंकि यह उन उम्मीदवारों को लाभ दे सकती है जिनके पास पहले से संबंध या संसाधन हैं, न कि वास्तविक शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों को।
मांग: SFI प्रस्ताव करती है कि या तो प्रवेश प्रक्रिया से शोध प्रस्ताव के लिए अंकों का आवंटन हटा दिया जाए ताकि पक्षपात रोका जा सके, या एक न्यूनतम सीमा लागू की जाए, जिससे यह सुनिश्चित हो कि प्रत्येक प्रस्ताव प्रस्तुत करने वाला उम्मीदवार आवंटित अंकों का कम से कम 40% (उदाहरण के लिए, 15 में से 6 अंक) प्राप्त करे। इससे भेदभावपूर्ण प्रथाओं की संभावना कम होगी और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित होगा।
5. Ph.D. विद्वानों के रिकॉर्ड के लिए पारदर्शी ऑनलाइन तंत्र की आवश्यकता
वर्तमान में, Ph.D. विद्वानों और उनके सुपरवाइज़रों के बारे में आवश्यक विवरणों को ट्रैक करने के लिए कोई सार्वजनिक रूप से सुलभ ऑनलाइन तंत्र नहीं है। संकाय सदस्यों के नाम, उनकी देखरेख में शोध विद्वान, पंजीकरण की तारीख, सिनॉप्सिस अनुमोदन की तारीख, और शोध विद्वानों की प्रगति रिपोर्ट की स्थिति जैसी जानकारी व्यवस्थित रूप से दर्ज या उपलब्ध नहीं की जाती है।मांग: SFI एक स्पष्ट और पारदर्शी ऑनलाइन तंत्र बनाने पर जोर देती है, जो सार्वजनिक डोमेन में सुलभ हो, और जिसमें Ph.D. विद्वानों और उनके सुपरवाइज़रों के बारे में व्यापक विवरण हों। इसमें संकाय सदस्यों के नाम, उनकी देखरेख में शोध विद्वानों की सूची, उनकी पंजीकरण तारीखें, सिनॉप्सिस अनुमोदन तारीखें, और प्रगति रिपोर्ट की स्थिति शामिल होनी चाहिए, जैसा कि विनियमों के खंड 5(9) में अनिवार्य है, ताकि जवाबदेही और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके।
6. कोर्सवर्क कार्यान्वयन में पारदर्शिता और गंभीरता की कमीकई विभाग Ph.D. कोर्सवर्क को पारदर्शी तरीके से संचालित करने में विफल रहते हैं, अक्सर फर्जी उपस्थिति दर्ज करते हैं। शोध विद्वानों को कोर्सवर्क परीक्षाओं को स्वयं अध्ययन के माध्यम से उत्तीर्ण करना पड़ता है, और कोर्सवर्क प्रक्रिया की गंभीरता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं, जैसा कि खंड 7 में उल्लिखित है।मांग: SFI पारदर्शी कोर्सवर्क कार्यान्वयन की सख्ती से लागू करने की मांग करती है, जिसमें नियमित उपस्थिति निगरानी, समय पर कक्षाओं का संचालन, और एक संरचित पाठ्यक्रम का पालन शामिल हो। विश्वविद्यालय को कोर्सवर्क की गंभीरता सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करने चाहिए, जैसे कि अनिवार्य व्यक्तिगत या ऑनलाइन कक्षा भागीदारी, नियमित मूल्यांकन, और विभागीय परिषद द्वारा निरीक्षण, ताकि कदाचार को रोका जा सके।
7. सुपरन्यूमेरेरी सीट आवंटन में अनियमितताएँ और सेवारत कर्मचारियों के लिए दिशानिर्देशों की कमी
कई सुपरन्यूमेरेरी सीटें, जो विशिष्ट श्रेणियों जैसे नियमित संकाय या विदेशी नागरिकों के लिए हैं (खंड 5(7)), बिना उचित विज्ञापन, नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC), या स्वीकृत अवकाश के भर दी जाती हैं। सेवारत कर्मचारियों के लिए NOC या अवकाश की आवश्यकता के संबंध में कोई स्पष्ट दिशानिर्देश नहीं हैं, जिसके कारण असंगतियाँ होती हैं। इसके अतिरिक्त, कुछ निजी संस्थानों के शिक्षक, विश्वविद्यालय संकाय की मिलीभगत से, इन खामियों का दुरुपयोग करते हैं और विश्वविद्यालय नियमों को दरकिनार करते हैं, जिससे प्रवेश प्रक्रिया की अखंडता से समझौता होता है।मांग: SFI विश्वविद्यालय से सुपरन्यूमेरेरी सीटों के आवंटन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश स्थापित करने की मांग करती है, जिसमें उचित विज्ञापन और पात्रता मानदंडों का पालन सुनिश्चित हो, जैसे कि सेवारत कर्मचारियों के लिए NOC और स्वीकृत अवकाश जमा करना। NOC और अवकाश के लिए एक मानकीकृत प्रक्रिया को परिभाषित और लागू किया जाना चाहिए, और इन नियमों का उल्लंघन करने वाले शिक्षकों या संस्थानों के लिए सख्त दंड के साथ, विश्वविद्यालय की प्रवेश प्रक्रिया की अखंडता को बनाए रखा जाए।
SFI हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में वर्तमान Ph.D. विनियमों का कड़ा विरोध करती है क्योंकि इनका छात्रों, विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर और हाशिए पर रहने वाले पृष्ठभूमि के छात्रों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। महत्वपूर्ण शुल्क वृद्धियाँ, आरक्षण और सीट आवंटन में पारदर्शिता की कमी, व्यक्तिपरक प्रवेश मानदंड, अधूरी फेलोशिप प्रतिबद्धताएँ, और प्रक्रियात्मक अनियमितताएँ उच्च शिक्षा तक पहुँच और शैक्षणिक अखंडता को कमजोर करती हैं। SFI तत्काल सुधारों की मांग करती है, जिसमें शुल्क में कमी, स्पष्ट आरक्षण नीतियाँ, सीट और विद्वान रिकॉर्ड प्रबंधन के लिए पारदर्शी तंत्र, निष्पक्ष प्रवेश प्रक्रियाएँ, और कोर्सवर्क और सुपरन्यूमेरेरी सीट आवंटन की सख्त निगरानी शामिल है, ताकि HPU में एक समान और न्यायपूर्ण Ph.D. कार्यक्रम सुनिश्चित हो।
SFI ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (HPU) में एकपक्षीय निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की है, जहां महत्वपूर्ण नीतियों को डीन समिति या अकादमिक परिषद की स्थायी समिति के नाम पर केवल 5-6 व्यक्तियों के छोटे समूह द्वारा निर्धारित किया जाता है। ये समितियाँ राज्य की सामाजिक-आर्थिक वास्तविकताओं पर विचार किए बिना नीतियाँ बनाती हैं, बल्कि इन्हें अपने स्वयं के बच्चों या संरक्षित व्यक्तियों के पक्ष में तैयार करती हैं, जो एक सार्वजनिक संस्थान में अलोकतांत्रिक दृष्टिकोण को दर्शाता है। विश्वविद्यालय पिछले 4-5 वर्षों से पूर्ण अकादमिक परिषद की बैठक बुलाने में विफल रहा है, जिससे उचित परामर्श की उपेक्षा हुई है। छात्रों के लिए हानिकारक निर्णय जल्दबाजी में कपटपूर्ण तरीकों से लिए जाते हैं, और डीन समिति अक्सर बिना गहन अध्ययन या विचार-विमर्श के नीतियों को कॉपी और पेस्ट करके लागू कर देती है।













