April 15, 2026 12:08 pm

334 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द।

नई दिल्ली।बिहार विधानसभा चुनाव से पहले भारत के चुनाव आयोग बड़ी कार्रवाई की है। चुनाव आयोग ने निर्वाचन प्रणाली की सफाई की बात करते हुए 334 राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। देश में सिर्फ छह राष्ट्रीय दल हैं। इसके अलावा क्षेत्रीय पार्टियों की संख्या घटकर 67 रह गई है। बता दें कि भारत में राजनीतिक दलों का रजिस्ट्रेशन, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के प्रावधानों के तहत निर्वाचन आयोग में किया जाता है। राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन के लिए जारी दिशानिर्देशों में यह प्रावधान है कि यदि कोई दल लगातार छह वर्षों तक चुनाव नहीं लड़ता है, तो उसे पंजीकृत दलों की सूची से हटा दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत दल को रजिस्ट्रेशन के समय अपना नाम, पता, पदाधिकारियों के नाम आदि का विवरण देना होता है। इनमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन होने पर उसे बिना विलंब निर्वाचन आयोग को सूचित करना अनिवार्य है। हालांकि आयोग के इस आदेश के खिलाफ 30 दिन के भीतर प्रभावित पक्ष की ओर से अपील की जा सकती। इससे पहले, जून 2025 में निर्वाचन आयोग ने राज्यों एवं केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को 345 दलों की जांच करने का निर्देश दिया था। मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने इसकी जांच की, इन दलों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया।प्रत्येक दल को व्यक्तिगत सुनवाई के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर प्रदान किया गया। इसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की रिपोर्ट के आधार पर पाया गया कि कुल 345 दलों में से 334 तय शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। शेष मामलों को पुन: जांच के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को वापस भेजा गया है। आयोग ने सभी तथ्यों और मुख्य निर्वाचन अधिकारियों की अनुशंसाओं पर विचार करने के बाद 334 दलों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। यह प्रक्रिया राजनीतिक व्यवस्था को स्वच्छ करने और ऐसी पार्टियों को सूची से हटाने के उद्देश्य से संचालित की गई है, जिन्होंने 2019 के बाद से कोई भी लोकसभा या राज्य-केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभा या उपचुनाव नहीं लड़ा है और जिनका वास्तविक रूप से पता नहीं लगाया जा सका है। इस कदम राजनीतिक प्रणाली में शुद्धता लाने के मकसद से उठाया गया है। चुनाव आयोग की नई कार्रवाई के बाद अब देश में सिर्फ छह राष्ट्रीय पार्टियां रह गई हैं। उनमें देश की सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), मुख्य विपक्षी कांग्रेस, अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (आप), मायावती की बहुजन समाज पार्टी (बसपा), कॉम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माक्र्सवादी)और राष्ट्रीय पिपुल्स पार्टी

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