Shimla.साइबर ठग लोगों के व्हाट्सएप एकाऊंट को हैक कर उनके मित्रों से किसी आपातकालीन समस्या का हवाला देते हुए अवैध रुप से पैसों की मांग कर रहे हैं। साइबर ठगों ने इस प्रकार के अपराध को अंजाम देने के लिए नए नए तरीके का प्रयोग किया जा रहा है, साइबर पुलिस ने इस बारे में लोगों के लिए एडवाईजरी जारी की है। साईबर ठगों द्वारा लोगों के सिम को टू जी से फोर जी में अपग्रेड करने या नेटवर्क कनेक्टविटी को बेहतर बनाने का हवाला देते हुए लोगों के पास ग्राहक सेवा अधिकारी बनकर फोन किया जाता है। जिसमें उपरोक्त समस्याओं के निराकरण हेतु लोगों को बेवकूफ बनाकर उनसे कॉल फावर्डिंग का कोड डायल कराया जाता है। जिससे सामने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर आने वाले सभी फोन , डायल कराये गये नंबर पर डायवर्ट हो जाती है। उदाहरण के लिए जैसे यदि किसी रिलायंस जियो के नंबर पर आने वाले सभी कॉल को डायवर्ट करना है तो मोबाइल में *401*xxxxxxxxxx (वह मोबाइल नंबर जिस पर कॉल डायवर्ट करनी है, डायल करने पर कॉल डायवर्ट हो जाती है।इसी प्रकार सभी टेलीकॉम कंपनियों के अलग-अलग डायवर्ट कोड हैं। इसके बाद साइबर ठगों द्वारा अपने मोबाइल में व्हाट्सएप को खोलकर उसमें पीडि़त के मोबाइल नंबर को डाला जाता है, मोबाइल नंबर वेरीफिकेशन व व्हाट्सएप एक्सेस के लिए सर्वप्रथम टेक्स्ट मैसेज जाता है। जब एप में ओटीपी नही डाली जाती तो कुछ समय पश्चात ओटीपी प्राप्त करने हेतु कॉल का ऑप्शन साइबर अपराधियों द्वारा चुना जाता है, जिसपर व्हाट्सएप द्वारा ओटीपी डिलीवर्ड करने हेतु कॉल किया जाता है। क्यूंकि उस नंबर पर आने वाले सभी कॉल पहले से ही साइबर अपराधी के मोबाइल पर डायवर्ट होते हैं। जिससे व्हाट्सएप की ओटीपी डिलीवरी कॉल साइबर ठगों के मोबाइल नंबर पर जाती है जहां से ओटीपी प्राप्त कर पीडि़त के व्हाट्सएप का एक्सेस साइबर अपराधियों द्वारा ले लिया जाता है तथा टू स्टेप वेरीफिकेशन भी लगा दिया जाता है जिससे पीडि़त पुन: अपने व्हाट्सएप खाते का एक्सेस नही ले पाता है। अब साइबर आपराधियों द्वारा पीडि़त के परिचित, मित्रों आदि से तमाम प्रकार की समस्याओं का हवाला देते हुए अवैध रुप से पैसे की मांग की जाती है । इस ट्रैप में फंसकर लोग साइबर ठगों को अपना मित्र समझकर पैसे ट्रांसफर कर देते है। उधर, डीआईजी साइबर क्राइम मोहित चावला का कहना है कि साईबर ठगों द्वारा ठगी का यह नया तरीका अपनाया जा रहा हैं।उन्होंने लोगों से इस बारे में सावधान रहने को कहा है। उन्होंने लोगों से कुछ सावधानियां बरतने की अपील की है। डीआईजी मोहित चावला ने बताया कि बिना जांचे परखे अनजान कॉल पर बताए गए कोड को अपने मोबाइल फोन में न डालें और हमेशा अपने सोशल मीडिया के खातों का मजबूत पासवर्ड बनाए जिसमें संख्या, अक्षर व चिह्न तीनों हो। अपने सोशल मीडिया खातों पर हमेशा टू-स्टेप वेरीफिकेशन लगा कर रखें। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यदि कोई पैसे की मांग कर करता है तो बिना जांचे परखे पैसे ट्रांसफर न करें। अपनी किसी भी समस्या के समाधान हेतु गूगल से ग्राहक सेवा अधिकारी का नंबर न निकाले, हमेशा संबंधित की ऑफिशियल बेवसाइट से ही संपर्क सूत्र ढूंढे।













