मंडी।| नियती का खेल देख लीजिए… बादल बरसे तो पूरे सराज मेंं तबाही की ऐसी तस्वीर उभरी, जिसे देख हर कोई सिहर उठा। इस तबाही के बाद पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर सबसे पहले लोगों के आंसू पोंछने के लिए सराज पहुंचे। बादल फटने के बाद त्रासदी की इन तस्वीरों को देख जयराम ठाकुर विधानसभा क्षेत्र के लोगों के आंसू पोंछते-पोंछते जब दस दिन बाद अपने घर पंहुचे, तो तबाही का मंजर देख व्यथित हो गए। इस मंजर ने उनको अंदर से इतना तोड़ा कि पांव लडख़ड़ा गए और आंखें भर आर्ईं। घर की ओर जाती पगडंडी पर जयराम ठाकुर लडख़ड़ा गए। अपनों की पीड़ा ने उनके चेहरे को दर्द से भर दिया। घर की दरारें देख जयराम ठाकुर भावुक हो गए। बिना कुछ बोले बस उस घर को निहारते रहे, जहां से जीवन की डगर पर चलना सीखा था।इस घर की चौखट से निकलकर के जयराम ठाकुर ने सियासत की सीढिय़ां हिमाचल की सत्ता के उच्चतम पद तक चढ़ी भी और आज त्रादसी ने उसी घर की नींव हिला दी। घर के पास लैंड स्लाइड से बगीचा गया, बाथरूम का नामोनिशान मिटा और खतरे की जद में आए इस घर से एक भाई भागने को मजबूर हो गया। जयराम ने तीन विधानसभा चुनाव इसी घर में रह करके लड़े और सराज (चच्योट) का प्रतिनिधित्व किया। तांदी में बने इस पुश्तैनी घर की दरारों ने विपक्ष के नेता जयराम ठाकुर क ो अंदर तक हिला दिया। इस पुश्तैनी घर में जयराम ठाकुर के भाई बीरी सिंह और उनका परिवार रहता है। 30 जून और पहली जुलाई की रात जब बारिश हुई, तो पूरा परिवार जयराम ठाकुर के उस घर में पहुुंचा, जो हिमाचल की सियासत की शक्ति का केंद्र है।जयराम ठाकुर दस दिनों के बाद चंद पलों के लिए अपने पुश्तैनी घर पंहुचे थे और अपने आंसुओं को अपने अंदर ही समेटकर क्षेत्र के दूसरे लोगों को ढांढस बधाने के लिए चल दिए। 10 दिन बाद जयराम ठाकुर अपने पुराने घर की दरारें देखकर के कुछ पल के लिए यूं लडख़ड़ाए मानों उनकी दुनिया ही उजड़ गई हो। इसके बाद जयराम अपना दर्द समेटकर आगे बढ़ गए, लेकिन इस त्रासदी ने पूरे सराज को ऐसे जख्म दिए हैं, जिन्हें समेट पाया प्रक ृति के अलावा किसी के बस की बात नहीं है।













