शिमला सितम्वर।फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) शिमला जिला कमेटी का छात्रा उप समिति अधिवेशन 5 सितंबर 2026 को चितकारा पार्क कैथू में सफल आयोजन किया गया। अधिवेशन से पूर्व छात्रा उप समिति ने पंचायत भवन से डीसी ऑफ़िस शिमला तक “शिक्षण संस्थानो में छात्राओं के घटते प्रवेश पर रोक और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करो” कि मांग को लेकर एक बड़ी रैली का आयोजन किया गया। इस रैली में 170 से अधिक छात्राओं ने हिस्सा लिया। इस महत्वपूर्ण अधिवेशन में शिमला जिला के कोने-कोने से आए 22 विभिन्न महाविद्यालयों और विद्यालयों से लगभग 130 छात्राओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। अधिवेशन का मुख्य उद्देश्य शिक्षण संस्थानों में छात्राओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और परिसरों में सुरक्षित व समतामूलक माहौल तैयार करने के लिए संघर्ष की रूपरेखा तय करना रहा। अधिवेशन में 35 सदस्य छात्रा उपसमिति का गठन किया गया। जिसमें कॉमरेड कृतिका को संयोजक और कॉमरेड रेणुका को सह संयोजक चुना गया। अधिवेशन में 5 महत्वपूर्ण प्रस्ताव उच्च शिक्षा में छात्राओं की स्थिति, शैक्षणिक संस्थानों में जनवादी रूप से लिंग 2 कमेटी का का निर्माण किया जाए, सिया की स्मृति में: असामाजिक तत्वों पर युवाओं में नशीली दवाओं के प्रसार के खिलाफ प्रस्ताव, NEP 2020 के खिलाफ प्रस्ताव, शैक्षणिक संस्थानों में मासिक धर्म स्वच्छता, स्वास्थ्य और शिक्षा का अधिकार को लेकर चर्चा कर लागू किया गया। जिसको लेकर भविष्य में एस एफ आई छात्राओं को लामबंद करते हुए आंदोलन को मजबूत करेंगी।अधिवेशन का उद्घाटन SFI की अखिल भारतीय उपाध्यक्ष कॉमरेड शिल्पा ने किया। प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कामरेड शिल्पा ने वर्तमान केंद्र सरकार की नीतियों से शैक्षणिक संस्थाओं में छात्राओं को आ रही समस्याओं पर बात रखी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के लागू होने से देश की शिक्षा व्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है, जिसके चलते विशेष रूप से गरीब व मध्यम वर्ग की छात्राओं के नामांकन (Enrollment) में भारी गिरावट दर्ज की गई है।।सरकार जो इस शिक्षा नीति से छात्रों को समतामूलक और समावेशी शिक्षा प्रदान करने की बात कर रही थी पूरी तरह से नाकामयाब सिद्ध हो रही है । इस शिक्षा नीति ने शिक्षा को गरीब और माध्यम वर्ग के छात्रों से दूर करने का काम किया है। NEP के तहत शिक्षा के बाजारीकरण ने छात्राओं के लिए उच्च शिक्षा के दरवाजे बंद करने का काम किया है। कामरेड शिल्पा ने शिक्षण संस्थानों में छात्राओं की सुरक्षा और अधिकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों पर भी विस्तार से बात रखी। उन्होंने कहा कि सभी स्कूलों और कॉलेजों में लिंग संवेदनशील कमेटियों (GSCASH) का गठन लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि छात्राएं अपने प्रतिनिधियों का प्रत्यक्ष रूप से चुनाव कर सके और बिना किसी भय के अपनी बात रख सकें , उन्होंने अप्रत्यक्ष तरीके से कमेटी गठन की आलोचना की ,क्योंकि उसमें छात्राओं की कोई भागीदारी नहीं होती और प्रशासन उन कमेटियों को अपनी कठपुतली की तरह इस्तेमाल करते है जिससे छात्राएं अपनी बात सही तरीके से नहीं उठा पाती। इसके साथ ही उन्होंने देश भर में महिलाओं और छात्राओं पर लगातार बढ़ते हमलों, हिंसा और यौन उत्पीड़न की घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की। देश में एक दिन में लगभग 88 रेप की शिकायतें दर्ज होती है , और सरकार एक तरफ तो “बेटी बचाओ – बेटी पढ़ाओ ” का नारा देती है और वहीं दूसरी तरफ शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं को अच्छा वातावरण देने में असमर्थ है। हालिया की घटनाएं जिसमें उत्तराखंड में अंकिता भंडारी के साथ हुई घटना हो , चाहे मणिपुर में दो महिलाओं को नंगा घुमाया जाना हो, चाहे महाराष्ट्र में एक महिला डॉक्टर के साथ जातिगत भेदभाव के चलते आत्महत्या करना हो, चाहे हिमाचल प्रदेश में कामरेड सिया गुलेरिया को एक नशे में धुत व्यक्ति द्वारा हत्या किया जाना हो, अनेकों अनेक ऐसे उदाहरण है जो देश में यह दर्शाते है कि चाहे केंद्र की भाजपा सरकार हो या अन्य सरकारें हो महिलाओं और छात्राओं को अच्छा वातावरण देने में नाकामयाब सिद्ध हुई हैकेंद्र सरकार जहां एक तरफ जहां महिलाओं को 33% आरक्षण देने और महिला सशक्तिकरण के बड़े-बड़े दावे करती है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर ये सभी दावे पूरी तरह खोखले साबित हो रहे हैं। सरकार शैक्षणिक संस्थानों में छात्राओं को मूलभूत सुविधाएं देने में असमर्थ हो रही है। कामरेड शिल्पा ने शिमला जिला की तमाम छात्राओं से अपने संवैधानिक व शैक्षणिक अधिकारों के प्रति एकजुट होने का आह्वान किया। अब छात्राओं को अपने अधिकारों और सुरक्षा की लड़ाई को और अधिक तेज़ करना होगा। SFI शिमला जिला छात्रा उप समिति ने भी यह संकल्प लिया है कि वह आने वाले समय में जिले के प्रत्येक कैंपस में छात्राओं की समस्याओं को प्रमुखता से उठाएगी और उनके सम्मान, सुरक्षा तथा समान शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष जारी रखेगी।









