। नेता प्रतिद्वंदी अर्थशास्त्री ठाकुर ने कहा कि सुक्खू सरकार के विभाग से राजस्व राजस्व बनाने को लेकर तीसरे साल भी पैसा मांगा जा रहा है। जिस तरह से शराब के थैंक्स की नीलामी में कई इकाइयों के लिए कोई बोली लगाने वाला सामने नहीं आ रहा है, ऐसा लग रहा है कि सरकार की कंपनियों की कंपनियों में कोई न कोई खामी है, जिसके कारण इतने बड़े पैमाने पर इकाइयां नीलाम नहीं हो रही हैं। इसके पीछे भी किसी न किसी तरह का गेम होने का अनुमान लोग जता रहे हैं। ठाकुर ने कहा कि सरकार ने पिछले साल भी नई शराब नीति से 40 प्रतिशत आय वृद्धि के मामले में हिमाचल के लोगों से झूठ बोला था। मुख्यमंत्री ने विधानसभा में कहा था कि नई शराब नीति से लेकर राजस्व में 40 प्रतिशत की बढ़त होगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। मुख्यमंत्री और सरकार में बैठे लोग बेकार स्की-झूठ बोल लें, लेकिन सच्चाई सामने आ ही जाती है। सच तो यह है कि नई शराब नीति से प्रदेश के राजस्व में कोई वृद्धि नहीं हुई है। मुख्यमंत्री को ऐसे झूठ बोलकर जनता को अनादर करना सही नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस सरकार में शराब माफिया का कब्जा है। यही कारण है कि शराब टेकन की फिल्मों का राजस्व नहीं बढ़ रहा है जबकि हमारे समय में कोविड जैसी महामारी के कारण हमने राजस्व कम नहीं किया था। सरकार के आंकड़ों के हिसाब से हाल में समाप्त वित्तीय वर्ष के दौरान भी कलाकारों के राजस्व में तीन तिमाहियों के दौरान पांच प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। जबकि मुख्यमंत्री हर जगह चालीस प्रतिशत वृद्धि का ढिंढोरा पीटते हैं। इसी तरह की बात है कि राज्य सरकार के हथधर्म से शराब के ठेके से राजस्व प्राप्ति का लक्ष्य पूरा नहीं हो पाया है। सोसायटी के पिछले दिन भी प्रदेशभर में कई इकाइयां बाइक नहीं चलीं और नौबत यहां तक आई कि कई आरक्षित स्थानों पर ही देने को मजबूर हो गए। आज के अखबारों में छपी खबरों के अनुसार अब तक कई बोतलों में कई इकाइयों की खरीद के लिए किसी की भी रुचि नहीं दिखी है। जबकि कई भंडारों पर आरक्षित बाजारों से भी नीचे बोली लगाने की आशंका आ रही है। सरकार को राजस्व प्राप्ति में तगादा नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि, सामान और मंडी में छुट्टियों के दिन भी नीलामी का दौर जारी है। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार को अपने झूठ से बाज आना चाहिए।













