। मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने अनाथ बच्चों के हित में एक और महत्वपूर्ण चरण में उन्हें बोना मोर हिमाचली प्रमाण-पत्र प्राप्त करने का अधिकार दिया है। राज्य सरकार ने यह फैसला उन अनाथ बच्चों के लिए लिया है, जो पिछले 15 साल से प्रदेश के बाल देखभाल की व्यवस्था हिमाचल में कर रहे हैं। इससे पहले, स्थिर दिशा-निर्देशों में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होने के कारण यह बच्चों की पढ़ाई की मंजूरी और रोजगार के अवसरों से संकट रह गए थे। मुख्यमंत्री ने 30 वर्ष, 2024 को बाल आश्रम टुटिकंडी के दौरे के दौरान इस समस्या को समझा और तत्परता से हल किया, इसकी समीक्षा कर समाधान पेश करने के निर्देश दिए गए। रिपोर्ट की गहन समीक्षा के बाद, राज्य सरकार ने अनाथ बच्चों को यह प्रमाण-पत्र जारी करने का निर्णय लिया, जिससे वह अन्य नागरिकों की तरह राज्य की इच्छाओं और मंजूरी का लाभ उठा सके। सीएम सुक्खू अनाथ बच्चों के कल्याण के लिए प्रति व्यक्ति व्यक्तिगत रूप से लगातार संदेश दे रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद सचिवालय जाने की बजाय मशालकांडी बाल आश्रम का दौरा किया, जहां उन्होंने बच्चों के साथ संवाद किया। उनके नेतृत्व में हिमाचल प्रदेश देश का पहला राज्य बनाया गया, जिन्होंने सभी 6,000 अनाथ बच्चों को ‘राज्य के बच्चे’ के रूप में कानूनी मान्यता दी। इसका नजरिया बच्चों की शिक्षा, देखभाल और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए ‘मुख्यमंत्री सुखश्रय योजना’ लागू की गई है। इस योजना के तहत अनाथ बच्चों के लिए समग्र वित्तीय और सामाजिक सुरक्षा की पेशकश की जा रही है, जिसमें भारत यात्रा, लघु यात्रा, जेब खर्च के रूप में प्रति माह 4,000 रुपये, 14 साल तक के बच्चों को 1,000 रुपये की मासिक सहायता, 15 से 18 साल के बच्चों और एकल महिलाओं को 2,500 रुपये की वित्तीय सहायता, 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता योजना, आवास के लिए 3 लाख रुपये की वित्तीय सहायता राशि शामिल है। मुख्यमंत्री समय-समय पर राज्य के बाल देखभाल आकर्षण का दौरा कर बच्चों की स्थिति की समीक्षा करते हैं। अनाथ बच्चों को बोना समुद्री डाकू हिमाचली प्रमाण पत्र-पत्र निर्णय उनके भविष्य को सुरक्षित करने और उन्हें अन्य नागरिकों के समान अधिकार और पद प्रदान करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है।













