April 15, 2026 6:51 pm

हो गया फैसला hptdc का हेड ऑफिस शिमला से कांगड़ा शिफ्ट।

शिमला।हिमाचल सरकार ने हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के हेड ऑफिस को शिमला से कांगड़ा या धर्मशाला शिफ्ट करने का बड़ा निर्णय लिया है। 1972 से एचपीटीडीसी का हेड ऑफिस किराए के भवन में शिमला में चल रहा है। वर्तमान में इस दफ्तर में लगभग 75 कर्मचारी कार्यरत हैं। शिमला शहर में बढ़ रहे बोझ को कम करने के मकसद से यह निर्णय लिया गया है। यह बात पर्यटन विकास निगम के अध्यक्ष आरएस बाली ने बीओडी की बैठक के बाद शिमला में पत्रकार वार्ता में कही। इससे पहले मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में राज्य सचिवालय में बैठक हुई थी। बैठक के बाद आएएस बाली ने शिमला में शाम को अलग से प्रेस वार्ता की। उन्होंने कहा कि धर्मशाला को पर्यटन राजधानी भी बनाया गया है। कांगड़ा में कई भवन खाली पड़े हैं, जिनमें कुनाल होटल, कश्मीरी हाउस और रजियाना सहित कई प्रॉपर्टी शामिल हैं। उनमें पर्यटन निगम हेड ऑफिस को शिफ्ट करने पर विचार चल रहा है। इसके अलावा भी कई खाली भवन पड़े हैं। उनमें भी इस दफ्तर को शिफ्ट किया जा सकता है। सरकार ने इसकी मंजूरी दे दी है। प्रक्रिया पूरी कर दफ्तर कांगड़ा शिफ्ट किया जाएगा। राजधानी शिमला में जोनल कार्यालय को वैसे ही रखा जाएगा।आरएस बाली ने बताया कि निदेशक मंडल की बैठक में पर्यटन निगम के 56 होटलों का जीर्णोद्धार करने का भी फैसला लिया है। एचपीटीडीसी की संपत्तियां, जिनमें ताले लटके हैं और सामान जंग खा रहा है, उनको भी लीज पर देने का विचार किया जाएगा। जो संपत्तियां चलने वाली होंगी, उनको चलाया जाएगा। ऐसी करोड़ों की संपत्तियां माता का बाग, बीड़ बिलिंग बिल्डिंग, ट्यूलिप गार्डन के अलावा और भी हैं। इनमें एशियन डिवेलपमेंट बैंक (एडीबी) का करोड़ों लगा हुआ है। पूर्व सरकार में इन संपत्तियों को इधर-उधर बांट दिया गया। फिर भी इनका इस्तेमाल नहीं हो पाया है। राज्य सरकार ने उनके बेहतर इस्तेमाल के निर्देश दिए हैं। इस दौरान आएएस बाली के साथ पर्यटन निगम के एमडी के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे। गौरतलब है कि हाल ही में रिसोर्स मोबिलाइजेशन की कैबिनेट सब कमेटी ने ऐसे सरकारी दफ्तरों को राजधानी से बाहर भेजने को कहा है, जो शिमला में किराए के भवनों में चल रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने स्थिति साफ करते हुए यह स्पष्ट किया है कि विभाग शिफ्ट नहीं किए जाएंगे, क्योंकि सचिवालय शिमला में हैं। सरकार बोर्ड और निगम को लेकर यह निर्णय ले सकती है।

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